Tuesday, July 21

भारत-तालिबान गठजोड़ का आरोप लगाकर फंसे पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता, ‘पैसे वापस’ वाले बयान पर उड़ा मजाक

इस्लामाबाद।
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता और इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा और मजाक का विषय बना हुआ है। मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने भारत और अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन के बीच कथित गठजोड़ का आरोप लगाया, लेकिन इस दौरान कही गई उनकी आपत्तिजनक और असंयमित टिप्पणी ने खुद पाकिस्तानी सेना को कटघरे में खड़ा कर दिया।

प्रेस ब्रीफिंग में डीजी ISPR ने आरोप लगाया कि भारत अफगानिस्तान में पाकिस्तान-विरोधी चरमपंथी तत्वों को न सिर्फ समर्थन दे रहा है, बल्कि उन्हें फंडिंग भी कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत और अफगान तालिबान मिलकर पाकिस्तान में आतंकवाद फैला रहे हैं। इस बयान में भारत और अफगानिस्तान के बढ़ते संबंधों को लेकर पाकिस्तान की बेचैनी साफ झलकती दिखाई दी।

जैसे आना है आओ, मजा आया तो पैसे वापस
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी का बयान अचानक एक अजीब मोड़ लेता दिखा। उन्होंने कहा, “हिंदुस्तान कहता है कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। वह कहता है कि हम इधर से भी आएंगे, उधर से भी आएंगे। हम कहते हैं—जैसे आना है आओ। दायें से आओ, बायें से आओ, ऊपर से आओ, नीचे से आओ, अकेले आओ या किसी के साथ आओ। एक बार मजा नहीं करा दिया ना, तो पैसे वापस।”

सेना के प्रवक्ता के इस बयान को कई लोगों ने गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए सोशल मीडिया पर जमकर मजाक उड़ाया। आलोचकों का कहना है कि एक परमाणु संपन्न देश की सेना के प्रवक्ता से ऐसी भाषा और स्तर की उम्मीद नहीं की जाती।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक यूजर ने लिखा, “पाकिस्तानी सेना के अधिकारी बॉलीवुड की थर्ड-रेट फिल्म के एक्टर लगते हैं।” वहीं, एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “क्या यह सच में किसी सेना का प्रवक्ता है? सुनने में तो ठेले पर खड़े सब्जीवाले जैसा लग रहा है।” एक और पोस्ट में लिखा गया, “जंग कभी जीती नहीं, चुनाव कभी हारे नहीं—पाकिस्तान आर्मी। 1971 में भी नियाजी ऐसे ही बढ़-बढ़कर बोल रहे थे।”

RAW और यूट्यूबर्स पर भी आरोप
यहीं नहीं, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डीजी ISPR ने भारत के कुछ पत्रकारों और यूट्यूबर्स के वीडियो भी चलाए और उन्हें भारतीय खुफिया एजेंसी RAW से जुड़ा हुआ बता दिया। उन्होंने दावा किया कि ये सभी अकाउंट भारत-तालिबान गठजोड़ का सबूत हैं और इससे पाकिस्तान के खिलाफ चल रहे ‘नेक्सस’ का खुलासा होता है।

हालांकि, रक्षा और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आरोप और बयान पाकिस्तान की आंतरिक असफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं। उनका कहना है कि बिना ठोस सबूत के इस तरह के दावे न सिर्फ पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि उसकी सेना की पेशेवर छवि को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

 

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