Tuesday, July 21

भारत का सर्विस सेक्टर दिसंबर में धीमी रफ्तार पर, 11 महीनों का न्यूनतम स्तर

नई दिल्ली: भारत के सर्विस सेक्टर की ग्रोथ दिसंबर 2025 में धीमी पड़ी, जिससे अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े हिस्से पर असर की आशंका बढ़ गई है। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) 11 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया। मुख्य कारण नए बिजनेस में आई कमी और घरेलू मांग में नरमी है।

दिसंबर में नए ऑर्डर्स की गति सबसे धीमी रही, जबकि रोजगार में बढ़ोतरी भी रुक गई। कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की संख्या स्थिर रखी और कुछ मामलों में कम भी किया। इससे संकेत मिलता है कि व्यवसाय अपने भविष्य को लेकर सतर्क हो गए हैं और आक्रामक विस्तार की बजाय मौजूदा संसाधनों का बेहतर उपयोग करने पर ध्यान दे रहे हैं।

कमजोर बिजनेस सेंटिमेंट
भविष्य की गतिविधियों को लेकर कंपनियों का भरोसा लगातार तीसरे महीने गिरकर कई साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। बढ़ती प्रतिस्पर्धा, मांग की अनिश्चितता और बाजार की अस्थिरता ने व्यवसायिक भरोसे को कमजोर किया है। यह संकेत है कि 2026 में सर्विस सेक्टर के विकास की रफ्तार को लेकर कंपनियां निश्चित नहीं हैं।

बाहरी मांग बनी मजबूत
घरेलू मांग में सुस्ती के बावजूद निर्यात ऑर्डर्स में मजबूती रही। एशिया, उत्तरी अमेरिका, मध्य पूर्व और ब्रिटेन जैसे विदेशी बाजारों से निरंतर मांग बनी रहने से सेवा क्षेत्र को सहारा मिला। इस प्रकार, भारत के सर्विस सेक्टर में निर्यात की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

महंगाई और उत्पादन लागत पर नियंत्रण
दिसंबर में उत्पादन लागत में केवल मामूली वृद्धि हुई, जो लंबे समय के औसत से कम रही। कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर नहीं डाला, जिससे आउटपुट प्राइस इन्फ्लेशन भी कमजोर रहा।

निष्कर्ष:
कुल मिलाकर, दिसंबर के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारत का सर्विस सेक्टर अभी भी मजबूत है, लेकिन ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ रही है। नए ऑर्डर्स में कमी, रोजगार में ठहराव और कमजोर व्यावसायिक भरोसे ने संकेत दिया कि अब व्यवसाय अधिक सतर्क और संतुलित दृष्टिकोण अपना रहे हैं। निर्यात मांग और महंगाई में नियंत्रण कुछ स्थिरता प्रदान कर रहे हैं, लेकिन 2026 में सेवा क्षेत्र की विकास यात्रा को लेकर सावधानी बरती जा रही है।

 

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