Tuesday, July 21

इनकम टैक्स फाइलिंग में ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स आगे, सैलरीड क्लास पीछे

नई दिल्ली: भारत में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने वालों के प्रोफाइल में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। क्लियरटैक्स की रिपोर्ट ‘How India Filed in 2025’ के अनुसार अब नौकरीपेशा लोग सबसे ज्यादा टैक्स फाइल नहीं कर रहे हैं। इसके बजाय, बिजनेस करने वाले प्रोफेशनल, ट्रेडर्स और निवेशक (Investors) सबसे आगे निकल रहे हैं।

सैलरीड क्लास की संख्या घट रही
पहले ज्यादातर सैलरीड लोग ITR-1 फॉर्म भरते थे, क्योंकि उनकी कमाई फिक्स सैलरी से होती थी। लेकिन अब ITR-2 और ITR-3 फाइल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ITR-3 फाइल करने वालों में 2025 में 45% की बढ़ोतरी हुई, जिसमें छोटे बिजनेसमैन, ट्रेडर और F&O मार्केट में एक्टिव लोग शामिल हैं। वहीं, ITR-2 फाइल करने वालों की संख्या 17% बढ़ी, जो सैलरीड होते हुए भी निवेश और कैपिटल गेन से कमाई दिखाते हैं।

टैक्स फाइलिंग बन गईफाइनेंशियल बायोग्राफी
आज इनकम टैक्स रिटर्न सिर्फ सैलरी दिखाने का माध्यम नहीं रह गया है। यह लोगों की पूरी वित्तीय स्थिति का आईना बन गया है—कितना निवेश कर रहे हैं, मार्केट में कितना हिस्सा ले रहे हैं और अलग-अलग प्रॉपर्टी में पैसा लगा रहे हैं।

युवाओं में तेजी से बढ़ रही भागीदारी
25-35 साल के मिलेनियल्स अब ITR-3 फाइल करने वालों में 42% से अधिक हैं। वे नौकरी शुरू होते ही शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेशों में सक्रिय हो जाते हैं। इसके अलावा, जेन Z टैक्सपेयर्स (25 साल से कम उम्र) भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ITR-2 फाइल करने वाले जेन Z की संख्या में सालाना लगभग 18% की बढ़ोतरी हुई है।

निष्कर्ष:
रिपोर्ट से स्पष्ट है कि भारत में टैक्स फाइलिंग का परिदृश्य बदल रहा है। अब यह केवल सैलरीड क्लास का काम नहीं रह गया, बल्कि व्यापारियों, निवेशकों और युवाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रक्रिया बन गई है।

 

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