Tuesday, July 21

कुत्ते कब काटने के मूड में हैं, कैसे समझें? सुप्रीम कोर्ट ने दिया जवाब, कपिल सिब्बल की दलील पर आई प्रतिक्रिया

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों के मामलों पर अहम सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कुत्तों के अजीब व्यवहार पर चिंता जताते हुए सवाल उठाया कि स्कूलों, अस्पतालों और अदालतों जैसी सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्ते क्यों होने चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि कुत्तों का व्यवहार समझ पाना मुश्किल है, और यह जानना कि वे कब काटने के मूड में हैं, असंभव है।

 

कोर्ट की टिप्पणी:

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया शामिल थे, ने कहा कि “कुत्ते के मूड को समझना संभव नहीं है,” और इस समस्या से निपटने के लिए रोकथाम इलाज से बेहतर है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि यदि कुत्ते सड़क पर चलते हुए साइकिल और वाहनों के पीछे दौड़ते हैं, तो इससे दुर्घटनाएं हो सकती हैं, और यह एक गंभीर समस्या बन सकती है।

 

कपिल सिब्बल का सुझाव:

इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि रेल मंत्रालय को भी NHAI की तरह इस मुद्दे में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कोई कुत्ता किसी के लिए खतरा बनता है, तो लोग एक हेल्पलाइन पर कॉल करके कुत्ते की नसबंदी करवा सकते हैं और उसे वापस छोड़ सकते हैं।

 

इसके जवाब में जस्टिस संदीप मेहता ने कहा, “कुत्ते की काउंसलिंग” करने की बात कही, ताकि कुत्ता वापस छोड़े जाने पर काटे नहीं।

 

सुप्रीम कोर्ट का आदेश:

कोर्ट ने यह भी पूछा, “आप कैसे जान सकते हैं कि सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है?” इसके बाद, सिब्बल ने यह सवाल उठाया कि क्या सभी कुत्तों को शेल्टर में रखना समाधान होगा? इस पर कोर्ट ने कहा कि वह यह नहीं कह रहे हैं कि सभी कुत्तों को शेल्टर में रखा जाए, लेकिन “कुत्ते हर जगह सड़कों पर क्यों होने चाहिए?”

 

कोर्ट ने कहा कि वह इस समस्या से अवगत हैं और अब एक ठोस समाधान की जरूरत है ताकि आवारा कुत्तों से जुड़ी घटनाएं फिर से न हों। इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।

 

 

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