Tuesday, July 21

इंदौर त्रासदी की पूरी तस्वीर सामने: सरकार ने माना 15 मौतें, पहले सिर्फ 6 पर अटके थे

 

 

इंदौर। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण फैले डायरिया प्रकोप की सच्चाई अब उजागर हो गई है। मध्य प्रदेश सरकार ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज की डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट के आधार पर पुष्टि की है कि मरने वालों की संख्या 6 नहीं बल्कि 15 है।

 

सरकारी अध्ययन के अनुसार, दूषित पानी के सेवन से जुड़े डायरिया और उल्टी जैसे लक्षणों के कारण ये मौतें हुईं। इंदौर के संभागीय आयुक्त सुदाम खाडे ने बताया, “हम अभी भी आगे के इनपुट का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर 15 मौतें दूषित पानी से सीधे जुड़ी हैं।”

 

डॉक्टर्स की टीम ने किया सर्वे

एमजीएम मेडिकल कॉलेज की पांच डॉक्टरों की टीम ने कुल 21 व्यक्तियों के मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की, जिनमें पिछले महीने मौतें हुई थीं। सर्वे का उद्देश्य यह पता लगाना था कि दूषित पेयजल पीने से कितने लोग प्रभावित हुए। यह अध्ययन 29 दिसंबर 2025 से अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या और मानवीय संकट के मद्देनजर किया गया।

 

सरकार ने पहले केवल छह मौतों की पुष्टि की थी, हालांकि क्षेत्र में कुल मौतों की संख्या 10 बताई जा रही थी। इसके बावजूद 18 मृतकों के परिजनों को मानवीय आधार पर 2 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया था।

 

रिपोर्ट के बाद आंकड़ों में बदलाव

सर्वे की रिपोर्ट ने पहले की सरकारी घोषणाओं में संशोधन किया है। अब सरकार ने आधिकारिक रूप से 15 मौतों की पुष्टि की है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। संभागीय आयुक्त सुदाम खाडे ने कहा कि यह मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है और सरकार इस पर निगरानी बनाए हुए है।

 

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