Tuesday, July 21

प्रधानमंत्री तक दायरे में… जस्टिस नागरत्ना के सवाल पर जस्टिस विश्वनाथन ने भी किया सवाल

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC ACT) की धारा 17A की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई की। यह धारा ड्यूटी पर मौजूद लोक सेवकों के कामकाज से जुड़े अपराधों की जांच से पहले केंद्र या राज्य सरकार की मंजूरी लेना अनिवार्य करती है। दो जजों—जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन—की पीठ ने इस प्रावधान पर अलग-अलग फैसले दिए, जिससे मामला बंटा हुआ माना गया। विभाजित फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के समक्ष भेज दिया है, ताकि नई पीठ इस पर पुनर्विचार कर सके।

जस्टिस नागरत्ना का रुख:
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने धारा 17A को असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान भ्रष्टाचार विरोधी कानून की नींव को बाधित करता है। पूर्व अनुमति के बिना जांच की रोक जनता के हित में नहीं है और इससे भ्रष्ट अधिकारियों को लाभ होता है। जस्टिस नागरत्ना के अनुसार, धारा 17A वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष वर्ग के रूप में अलग करती है, जो नीति-निर्णय में शामिल होते हैं, और यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती है।

जस्टिस विश्वनाथन का मत:
जस्टिस केवी विश्वनाथन ने इस फैसले से असहमति जताई। उनका कहना था कि धारा 17A कानून की शासन व्यवस्था के अनुरूप है और इससे ईमानदार लोक सेवक उत्पीड़न से बचते हैं। यदि इसे रद्द कर दिया गया, तो अधिकारियों के निर्णय लेने में हतोत्साह पैदा होगा। जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस प्रावधान के तहत लोकपाल या लोकायुक्त की जांच प्रक्रिया के अधीन हैं और इससे दुरुपयोग के डर से कार्रवाई नहीं रोकी जा सकती।

सवाल पर सवाल:
सुनवाई के दौरान जस्टिस विश्वनाथन ने जस्टिस नागरत्ना के काल्पनिक उदाहरण पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक वैधता का मूल्यांकन मौजूदा कानूनी ढांचे के आधार पर होना चाहिए, न कि काल्पनिक परिस्थितियों के आधार पर।

विशेषज्ञों की राय:
दिल्ली के एडवोकेट अनिल कुमार सिंह के अनुसार, दोनों जजों के फैसले विचारणीय हैं और नई पीठ इन दलीलों को ध्यान में रखेगी। जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस विश्वनाथन ने धारा 17A की संवैधानिकता को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा है, जो भ्रष्टाचार निवारण के कानून और प्रशासनिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण बहस को जन्म देता है।

 

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