Tuesday, July 21

मुंब्रा की हिजाब वाली पार्षद सहर शेख ने दिया विवादित बयान, AIMIM की जीत पर बोलीं – “पूरे इलाके को हरा रंगना है”

 

 

मुंबई: महाराष्ट्र में हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में मुंब्रा के वार्ड 30 से AIMIM की युवा पार्षद सहर शेख सुर्खियों में आ गई हैं। उनके जीत के तुरंत बाद दिए गए एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। सहर शेख ने कहा, “अल्लाह की ताकत से हमें जीत मिली है और अगले पांच साल में मुंब्रा को हरे रंग में रंगना है।” उनके इस बयान को कुछ लोगों ने विभाजनकारी बताया है।

 

राजनीतिक पृष्ठभूमि और जीत का सफर

29 वर्षीय सहर शेख ने अपनी पहली स्पीच में यह भी कहा कि वे किसी के बाप की मोहताज नहीं हैं। सहर शेख AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) की टिकट पर चुनाव लड़ीं और सिर्फ एनसीपी के प्रत्याशी शरद पवार के समर्थक जितेंद्र आव्हाण को ही नहीं हराया, बल्कि बीजेपी, शिवसेना और कांग्रेस के अन्य उम्मीदवारों को भी पीछे छोड़ते हुए 400 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।

 

सहर शेख की राजनीतिक यात्रा काफी दिलचस्प रही है। उनके पिता यूनुस शेख एनसीपी के पुराने नेता और मुंब्रा ब्लॉक प्रेसिडेंट रह चुके हैं। शुरुआत में सहर को उम्मीद थी कि उन्हें एनसीपी से नॉमिनेशन मिलेगा, लेकिन जब यह नहीं हुआ तो उनके पिता ने उन्हें AIMIM से चुनाव लड़ाने का फैसला किया।

 

सहर शेख और विधायक जितेंद्र आव्हाण के बीच पारिवारिक संबंध भी हैं। सहर अपने पिता के अच्छे दोस्त जितेंद्र को ‘अंकल’ कहती हैं। हालांकि, चुनाव में टिकट न मिलने के बाद सहर ने AIMIM से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

 

विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

सहर शेख के “मुंब्रा को हरा रंगना है” वाले बयान के बाद बीजेपी और शिवसेना समेत कुछ हिंदू संगठनों ने विरोध जताया। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की बात कही। सहर शेख ने बयान को स्पष्ट करते हुए कहा कि हरा रंग का मतलब केवल उनकी पार्टी AIMIM के झंडे के रंग से था और इसका किसी धर्म या समुदाय से कोई संबंध नहीं है।

 

संपत्ति और व्यक्तिगत जानकारी

सहर शेख ने 2017 में मुंबई यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ़ बिज़नेस मैनेजमेंट (BBM) की डिग्री प्राप्त की। चुनावी शपथपत्र के अनुसार, उनकी संपत्ति में लगभग 6,98,840 रुपये नकद और 120 ग्राम सोना शामिल है। उनके परिवार की सालाना आय 23,43,012 रुपये बताई गई है।

 

सहर शेख की जीत AIMIM के उभार का प्रतीक मानी जा रही है और यह क्षेत्रीय राजनीति में एनसीपी समेत अन्य पार्टियों के लिए चुनौती भी पेश कर सकती है।

 

 

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