Tuesday, July 21

नोएडा के खुले नाले बने ‘डेथ जोन’, 2 साल में 11 लोगों की मौत

 

नोएडा: स्मार्ट सिटी बनने के दावों के बीच नोएडा में एक भयावह हकीकत सामने आई है। शहर के खुले नाले और असुरक्षित तालाब लोगों के लिए मौत का जाल बन गए हैं। पुलिस और प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले दो साल में 11 लोग खुले नालों में गिरकर या डूबकर जान गंवा चुके हैं।

 

रात और सर्दियों के मौसम में कोहरे के कारण सड़क और नाले के बीच का फर्क धुंधला हो जाता है। बाइक या पैदल चलते वक्त लोग अचानक गहरे नाले में जा गिरते हैं। कई बार मोबाइल पर बात करने या संतुलन बिगड़ने के कारण भी ये हादसे होते हैं।

 

हालिया घटनाएँ:

 

7 जनवरी 2026: सेक्टर 17, जे जे कॉलोनी में 25 वर्षीय युवक खुले नाले में गिरकर मौत के मुंह में समा गया।

4 दिसंबर 2024: सेक्टर 9 के खुले नाले में व्यक्ति गिर गया और डूब गया।

28 सितंबर 2024: सेक्टर 52 में टहलते समय युवक नाले में गिरा और उसकी मौत हुई।

1 अक्टूबर 2024: सेक्टर 126, एक्सप्रेसवे सर्विस रोड पर तेज रफ्तार बुलेट पर सवार तीन युवक नाले में गिर गए, जिसमें एक की मौत हुई।

18 दिसंबर 2024: सेक्टर 73, सर्फाबाद गांव में बाइक सहित व्यक्ति नाले में गिरा और डूबने से मारा गया।

 

विशेष रूप से सेक्टर-150 में हाल ही में हुई घटना में एक युवा इंजीनियर कार सहित खुले तालाब में गिर गया और उसकी मौत हो गई। मौके पर न तो कोई बैरिकेडिंग थी और न चेतावनी बोर्ड। विशेषज्ञ इसे सीधे प्रशासनिक लापरवाही मान रहे हैं।

 

स्थानीय शिकायतों का अंबार, कार्रवाई केवल कागजों में

शहर के कई सेक्टर और गांव खुले नालों की वजह से ‘डेथ जोन’ बन चुके हैं। स्थानीय निवासी और सामाजिक संगठन लंबे समय से नोएडा अथॉरिटी से नालों को कवर करने, मजबूत रेलिंग लगाने और रिफ्लेक्टर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन हर हादसे के बाद केवल जांच की बात होती है, जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

 

नगरीय विकास के दावों के बावजूद खुले नाले और असुरक्षित तालाब नोएडा के लोगों के लिए सतत खतरे का सबब बने हुए हैं, और एक और बड़ा हादसा हमेशा इंतजार कर रहा है।

 

 

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