Tuesday, July 21

बार-बार शारीरिक संबंध और बच्चे का जन्म, हाई कोर्ट ने माना शादी जैसा रिश्ता, लव-अफेयर और लिव-इन पर बड़ा फैसला

मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने लव-रिलेशन और लिव-इन रिश्तों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। न्यायालय ने कहा कि लंबे समय तक चले अंतरंग संबंध, जिनमें बार-बार शारीरिक संबंध और एक बच्चे का जन्म शामिल है, घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम के तहत विवाह के समान संबंध माने जा सकते हैं। इस निर्णय के तहत महिला पार्टनर को पत्नी के अधिकार और लिव-इन से जन्मे बच्चे को सुरक्षा और भरण-पोषण का अधिकार दिया गया।

मामला क्या था

मुंबई की 22 वर्षीय युवती ने अपने लंबे समय से चले लव-एफ़ेयर के दौरान अपने पार्टनर के खिलाफ मामला दर्ज कराया। महिला के अनुसार, दोनों के बीच कई बार शारीरिक संबंध बने। पहली बार गर्भवती होने पर पार्टनर ने गर्भपात कराया, इसके बाद संबंध जारी रहा। दूसरी बार गर्भवती होने पर महिला ने गर्भपात से इनकार किया और आठ महीने बाद एक बच्ची का जन्म हुआ।

महिला ने आरोप लगाया कि मां बनने के बाद उसने पार्टनर से शादी की मांग की, लेकिन उसने इनकार कर दिया और 2022 में किसी अन्य महिला से विवाह कर लिया। इसके बाद महिला ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई।

अदालत ने क्या कहा

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि लंबे समय तक चलने वाले संबंध, बार-बार शारीरिक संबंध और बच्चे का जन्म प्रारंभिक तौर पर विवाह के समान संबंध के सूचक हैं। न्यायालय ने आरोपी और उसके परिवार की याचिका को खारिज कर दिया और महिला और उनकी बच्ची को भरण-पोषण का अधिकार बनाए रखा।

न्यायमूर्ति ने यह भी स्पष्ट किया कि पुरुष के बाद में किसी अन्य विवाह को इस प्रारंभिक संरक्षण को रद्द करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। पीठ ने कहा कि संबंध की अवधि, यौन संबंधों की प्रकृति और बच्चे की उपस्थिति विवाह जैसे संबंध की पुष्टि करते हैं।

महिला और बच्ची को मिली राहत

इस निर्णय के बाद महिला पार्टनर को पत्नी के बराबर अधिकार और लिव-इन से जन्मी बच्ची को सुरक्षा और पालन-पोषण का अधिकार मिला। आरोपी के माता-पिता और उनकी वर्तमान पत्नी को मामले से राहत दी गई।

हाई कोर्ट ने इस मामले में घरेलू हिंसा अधिनियम की उदार व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे रिश्ते में महिला को सुरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।

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