Tuesday, July 21

पद्म विभूषण के एलान से फंसा विपक्ष, अच्युतानंदन के मामले में CPM के पास नहीं बचा विकल्प

 

 

नई दिल्ली: केंद्रीय सरकार ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीएम के दिग्गज नेता वी एस अच्युतानंदन को पद्म विभूषण से सम्मानित करने की घोषणा कर के विपक्ष की राजनीतिक गणित को बिगाड़ दिया है। यह पहली बार है कि किसी बड़े कम्युनिस्ट नेता को, चाहे मरणोपरांत ही सही, भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जा रहा है।

 

केरल में सत्ताधारी सीपीएम इस स्थिति में बड़ी दुविधा में फंस गई है। सरकार के इस कदम ने प्रदेश की राजनीति को नया मोड़ दिया है। अच्युतानंदन के परिवार ने इस सम्मान को स्वीकार करने की बात कहकर सीपीएम को मुश्किल में डाल दिया है। उनके बेटे वी ए अरुण कुमार ने कहा, “यह देश से मिला सम्मान है। हम इसे स्वीकार करेंगे।”

 

पार्टी के लिए यह साल चुनावी वर्ष है और इस निर्णय के राजनीतिक मायने गंभीर हैं। इससे पहले सीपीएम के तीन दिग्गज नेताओं ने केंद्र सरकार से मिलने वाले पद्म पुरस्कारों को ठुकरा दिया था। केरल के पहले मुख्यमंत्री ई एम एस नंबूदरीपाद ने 1992 में पद्म विभूषण लेने से इनकार किया था। पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु और उनके उत्तराधिकारी बुद्धदेव भट्टाचार्य ने भी इसी तरह का रुख अपनाया था।

 

अब अच्युतानंदन के सम्मान के मामले में सीपीएम के पास औपचारिक विरोध करने या पुरस्कार अस्वीकार करने का विकल्प नहीं बचा है। पार्टी को चुप रहकर इस फैसले को स्वीकार करना होगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार ने इस कदम के जरिए केरल की राजनीति में दोनों हाथों में लड्डू लेने की रणनीति अपनाई है।

 

इस प्रकार, मोदी सरकार का यह दांव विपक्ष के लिए राजनीतिक चुनौती बन गया है और केरल की सत्ताधारी पार्टी सीपीएम के लिए चुनावी वर्ष में गंभीर सोच का विषय है।

 

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