Tuesday, July 21

उत्तराखंड UCC संशोधित अध्यादेश लागू, विवाह और लिव-इन संबंधों में किए गए अहम बदलाव

देहरादून: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) संशोधन अध्यादेश, 2026 को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की स्वीकृति मिलने के बाद तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस अध्यादेश के तहत विवाह और लिव-इन संबंधों में दबाव, बल, धोखाधड़ी या गैरकानूनी कृत्यों के लिए सख्त दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं।

अध्यादेश में कुल डेढ़ दर्जन संशोधन किए गए हैं, जिनका उद्देश्य यूसीसी के प्रावधानों को स्पष्ट, प्रभावी और व्यावहारिक बनाना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और नागरिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अब विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत जानकारी देने पर विवाह को निरस्त किया जा सकेगा।

इसके अलावा लिव-इन संबंध समाप्त होने पर पंजीयक द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी करने का प्रावधान किया गया है। इसी के साथ ‘विधवा’ शब्द को ‘जीवनसाथी’ से बदल दिया गया है।

संशोधन अध्यादेश महापंजीयक को विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से जुड़े पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति देता है। इसके साथ ही आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 लागू की गई है। उप-पंजीयक द्वारा समय सीमा के भीतर कार्रवाई न करने की स्थिति में प्रकरण स्वतः पंजीयक और महापंजीयक को अग्रेषित होंगे।

अध्यादेश में उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के खिलाफ अपील का अधिकार सुनिश्चित किया गया है और दंड वसूली को भूमि राजस्व के तौर पर करने का प्रावधान जोड़ा गया है।

उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य है। प्रदेश में यह कानून 27 जनवरी 2025 को लागू किया गया था।

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