Tuesday, July 21

‘महाकाल के सामने सब बराबर’ महाकाल मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी एंट्री वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

उज्जैन (मुनेश्वर कुमार/आईएएनएस): उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी प्रवेश को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि महाकाल के सामने कोई वीआईपी नहीं होता और गर्भगृह में कौन प्रवेश करेगा, यह फैसला मंदिर प्रशासन और जिला कलेक्टर का है।

महाकाल के सामने सब बराबर
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे अपनी मांग सीधे मंदिर प्रशासन के सामने रखें। अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों के आंतरिक नियमों और प्रबंधन में अदालत का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए। कोर्ट ने कहा, “महाकाल के दरबार में सब बराबर हैं, कोई विशेष दर्जा वाला नहीं होता।”

ढाई साल से बंद है आम दर्शन
याचिकाकर्ता का आरोप था कि गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन लगभग ढाई साल से बंद हैं, जबकि वीआईपी और प्रभावशाली व्यक्तियों को विशेष अनुमति से प्रवेश की खबरें सामने आती रही हैं। याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन बताया था।

हाईकोर्ट ने भी खारिज की थी याचिका
इससे पहले अगस्त 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि गर्भगृह में प्रवेश का निर्णय जिला कलेक्टर और मंदिर प्रशासक का अधिकार है।

कोरोना काल के बाद व्यवस्था
महाकाल मंदिर में कोरोना महामारी के बाद से आम दर्शन बंद हैं, श्रद्धालु बाहरी क्षेत्र से ही भगवान महाकाल के दर्शन कर पा रहे हैं। हालांकि, वीआईपी और प्रभावशाली नेताओं को विशेष अनुमति मिलने की घटनाओं से आम भक्तों में नाराजगी बनी रही है।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब याचिकाकर्ता को मंदिर प्रशासन से सीधे बातचीत करनी होगी, और यह फैसले मंदिर प्रशासन पर नियमों को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से लागू करने का दबाव बढ़ा सकते हैं।

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