Tuesday, July 21

ईरान की सेना अलर्ट मोड में, ट्रिगर पर उंगलियां; ट्रंप की धमकी पर तेहरान का सख्त पलटवार, न्यूक्लियर डील पर दिया संकेत

तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद ईरान ने तीखा पलटवार करते हुए साफ कर दिया है कि उसकी सेना किसी भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जोरदार और तत्काल जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। तेहरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह परमाणु समझौते पर बातचीत से इनकार नहीं करता, लेकिन किसी भी तरह की धमकी या दबाव को स्वीकार नहीं करेगा।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बयान जारी कर कहा कि ईरानी सशस्त्र सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं और देश पर किसी भी हमले की स्थिति में “ट्रिगर पर उंगली” रखे हुए हैं। उनका यह बयान ट्रंप की उस धमकी के बाद आया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका के साथ समझौता नहीं करता, तो उसे बड़े पैमाने पर अमेरिकी हमले का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि एक बड़ा अमेरिकी जंगी बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है और तेहरान के लिए समय तेजी से खत्म हो रहा है।

न्यूक्लियर डील पर नरमी के संकेत

कड़े तेवरों के बीच ईरान ने कूटनीतिक दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं किया है। विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि ईरान हमेशा से निष्पक्ष, बराबरी और आपसी लाभ पर आधारित परमाणु समझौते का समर्थक रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई भी समझौता स्वीकार्य होगा, जो दबाव, धमकी और डराने-धमकाने से मुक्त हो तथा ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के अधिकारों की गारंटी दे।
उन्होंने दोहराया कि ईरान परमाणु हथियारों का इच्छुक नहीं है और उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शोध और नागरिक ऊर्जा जरूरतों तक सीमित है।

इजरायल को भी चेतावनी

इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली शामखानी ने भी अमेरिका और उसके सहयोगियों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से किसी भी स्तर पर की गई सैन्य कार्रवाई को युद्ध की शुरुआत माना जाएगा और इसका जवाब “तुरंत, पूरी ताकत से और अभूतपूर्व” होगा। शामखानी ने संकेत दिया कि ऐसे किसी संघर्ष में इजरायल भी निशाने पर होगा।

ईरान की ओर बढ़ता अमेरिकी जंगी बेड़ा

तनाव इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि अमेरिकी नौसेना का एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन की अगुवाई में, ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन किसी सैन्य विकल्प पर विचार कर सकता है।
उधर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया कि ईरानी नेतृत्व अपने अब तक के सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है, जबकि जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि “इस्लामिक गणराज्य के दिन अब गिने-चुने रह गए हैं।”

बढ़ती तनातनी, दुनिया की नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तीखी बयानबाजी ने पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध के बादल घने कर दिए हैं। हालांकि, न्यूक्लियर डील पर ईरान के नरम संकेत यह भी दिखाते हैं कि टकराव के साथ-साथ कूटनीति की गुंजाइश अभी बाकी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह संकट बातचीत की मेज तक पहुंचता है या सैन्य टकराव की ओर बढ़ता है।

 

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