Tuesday, July 21

भारत–EU फ्री ट्रेड डील पर अमेरिका नाराज़, ट्रंप प्रशासन के ट्रेजरी सेक्रेटरी बोले—यूरोप ने निराश किया

वॉशिंगटन। भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (India–EU FTA) को लेकर अमेरिका में असहजता खुलकर सामने आ गई है। 27 जनवरी को नई दिल्ली में हुए इस करार को जहां यूरोपीय नेतृत्व ने “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया, वहीं ट्रंप प्रशासन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भारत के साथ समझौता करने को लेकर यूरोपीय संघ की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यूरोप का रवैया “निराशाजनक” है।

सीएनबीसी से बातचीत में बेसेंट ने कहा कि यह डील दिखाती है कि यूरोप ने अपने व्यापारिक हितों को यूक्रेन के लोगों के प्रति चिंता से ऊपर रखा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यूरोपीय देश अपने लिए जो बेहतर समझते हों, करें—लेकिन सच यह है कि वे बेहद निराशाजनक साबित हुए हैं।”

‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर अमेरिकी आपत्ति

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को अब तक की सबसे बड़ी डील बताया है। यूरोपीय संघ का दावा है कि यह समझौता दुनिया की उन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच हुआ है, जो वैश्विक जीडीपी के करीब 25 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करती हैं।
हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने संकेत दिया कि भारत पर ऊंचे टैरिफ लगाने के वॉशिंगटन के फैसले में यूरोप ने साथ नहीं दिया—और अब इस डील से उसकी वजह भी साफ हो गई है।

‘यूरोप ने व्यापार को प्राथमिकता दी’

बेसेंट ने कहा कि जब यूरोपीय नेता यूक्रेन के लोगों के महत्व की बात करते हैं, तो यह याद रखना चाहिए कि उन्होंने पहले व्यापार को चुना। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के साथ डील कर यूरोप ने अपने ही खिलाफ चल रहे युद्ध को फंड करने जैसा कदम उठाया है।

रूसी तेल को लेकर गंभीर आरोप

अमेरिकी मंत्री ने दावा किया कि रूसी कच्चा तेल भारत जाता है, जहां उसे रिफाइन कर यूरोप खरीदार बनता है। उनके शब्दों में, “इस तरह यूरोप अपने ही खिलाफ युद्ध को फाइनेंस कर रहा है।”
यह बयान उनके हालिया दावोस रुख से अलग है, जहां उन्होंने कहा था कि 25 प्रतिशत टैरिफ के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद में काफी कमी की है और टैरिफ हटाने का रास्ता खुल सकता है।

बदले तेवर, बढ़ा तनाव

भारत–EU डील के बाद अमेरिकी प्रशासन के तेवर एक बार फिर सख्त नजर आ रहे हैं। इससे पहले ट्रंप के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने भी कहा था कि रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका की चिंताओं को दूर करने के लिए भारत को अभी और कदम उठाने होंगे।

कुल मिलाकर, भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ यह ऐतिहासिक समझौता वैश्विक व्यापार संतुलन में बड़ा बदलाव लाता दिख रहा है—और इसी वजह से अमेरिका में राजनीतिक और आर्थिक हलचल तेज हो गई है।

 

This slideshow requires JavaScript.

Leave a Reply

This slideshow requires JavaScript.