Tuesday, July 21

अमेरिका-कनाडा रिश्तों में दरार, F-35 पर टकराव, क्या ग्रिपेन जेट खरीदेगा कनाडा?

वॉशिंगटन/ओटावा: ट्रंप प्रशासन की वापसी के बाद अमेरिका और कनाडा के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हो गए हैं। विवाद का मुख्य कारण है कनाडा का F-35 स्टील्थ फाइटर जेट सौदा। जनवरी 2023 में कनाडा ने अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन से 88 F-35 जेट्स खरीदने का 19 अरब कनाडाई डॉलर का सौदा किया था, ताकि पुराने CF-18 लड़ाकू विमानों को बदला जा सके।

लेकिन अमेरिकी धमकियों और ट्रंप प्रशासन के दबाव के बाद कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस सौदे की समीक्षा शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा ने 16 जेट्स के लिए पहले ही भुगतान कर दिया है, लेकिन शेष 72 जेट्स की डिलीवरी पर सवाल खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर कनाडा F-35 सौदा पूरा नहीं करता, तो NORAD यानी नॉर्थ अमेरिकन एयर डिफेंस गठबंधन की कार्यक्षमता पर गंभीर असर पड़ेगा। NORAD का मिशन दोनों देशों के एयरस्पेस की सुरक्षा, रडार और सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए एयरोस्पेस चेतावनी देना है।

टकराव तब और बढ़ गया, जब मार्क कार्नी ने दावोस में कहा कि “कनाडा अमेरिका की वजह से नहीं, बल्कि अपनी ताकत से आगे बढ़ रहा है।” इस पर ट्रंप ने कनाडा को भेजा गया ‘गाजा बोर्ड ऑफ पीस’ न्योता रद्द कर दिया और 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी भी दी।

इस बीच स्वीडन की डिफेंस कंपनी SAAB ने कनाडा को ग्रिपेन E/F फाइटर जेट और 6 ग्लोबलआई सर्विलांस एयरक्राफ्ट का प्रस्ताव दिया है। SAAB का कहना है कि अगर कनाडा प्रस्ताव स्वीकार करता है, तो ये जेट कनाडा में ही बनाए जाएंगे और लगभग 12,600 नई नौकरियां सृजित होंगी।

विश्लेषक सवाल कर रहे हैं कि क्या कनाडा अमेरिका से पंगा लेकर F-35 छोड़कर स्वीडिश ग्रिपेन जेट खरीदने की हिम्मत दिखा पाएगा। रॉयल कैनेडियन एयर फोर्स (RCAF) के नए कमांडर लेफ्टिनेंट-जनरल जेमी स्पीसर-ब्लांचेट के अनुसार, चीन और रूस के पास पांचवीं पीढ़ी के फाइटर और मिसाइलें हैं, इसलिए F-35 तकनीक कनाडा के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प बनी हुई है।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कनाडा किस दिशा में जाएगा, लेकिन अमेरिका-कनाडा रिश्तों में यह टकराव नई रणनीतिक चुनौतियाँ खड़ी कर रहा है।

 

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