Tuesday, July 21

सूरजकुंड मेला 2026: 31 जनवरी से शुरू, भारी वाहनों के लिए फरीदाबाद में नो-एंट्री

हरियाणा में सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला 2026 का आयोजन 31 जनवरी से 15 फरवरी तक फरीदाबाद में किया जाएगा। मेले का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन करेंगे। इस दौरान फरीदाबाद में भारी वाहनों के लिए नो-एंट्री लागू रहेगी, ताकि मेले में आने वाले आगंतुकों को सुविधा हो और यातायात सुचारू बना रहे।

भारी वाहनों के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी:
फरीदाबाद ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, मेले के दौरान पाली चौक से एमवीएन, सूरजकुंड रोड और अनखीर से शूटिंग रेंज/सूरजकुंड क्षेत्र में भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा। गुरुग्राम से आने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। वैकल्पिक मार्गों में सैनिक कॉलोनी मोड़, अनखीर चौक, बड़खल, पाली चौक, प्याली चौक, बाटा चौक और मथुरा रोड शामिल हैं। नोएडा और दिल्ली की ओर जाने वाले भारी वाहनों को पलवल या अन्य वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जाएगा।

मेले में पार्किंग की व्यवस्था:
मेले के आगंतुकों के लिए पार्किंग की सुविधा ईरोज सिटी पार्किंग, हेलीपैड और लेकवुड सिटी पार्किंग जैसे चिन्हित स्थानों पर उपलब्ध होगी। यह व्यवस्था यातायात जाम से बचने और आगंतुकों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

पर्यटन मंत्री ने क्या कहा:
हरियाणा के विरासत और पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने बताया कि 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प महोत्सव भारत और विश्व के सांस्कृतिक मानचित्र पर एक सशक्त छाप छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि महोत्सव का मार्गदर्शक मंत्र लोकल से ग्लोबल–आत्मनिर्भर भारत’ रखा गया है। यह आयोजन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों, शिल्पकारों और बुनकरों की सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ करेगा और रचनात्मक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को नई दिशा देगा।

उद्घाटन और समापन:
31 जनवरी को फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड में आयोजित शिल्प सम्मेलन का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन करेंगे। केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी विशेष अतिथि होंगे। समापन समारोह 15 फरवरी को होगा, जिसमें राज्यपाल प्रो. आशीष कुमार घोष मुख्य अतिथि रहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और सांस्कृतिक कार्यक्रम:
इस साल 50 से अधिक देशों के करीब 800 प्रतिभागी महोत्सव में हिस्सा लेंगे। चौथी बार भागीदार राष्ट्र के रूप में मिस्र अपनी प्राचीन कला और संस्कृति प्रस्तुत करेगा। थीम राज्य उत्तर प्रदेश और मेघालय अपने लोक जीवन, सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का प्रदर्शन करेंगे।

महोत्सव में 1,200 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे, जिनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बुनकर, कारीगर और पारंपरिक शिल्पकला की प्रदर्शनी एवं बिक्री होगी। सांस्कृतिक संध्याओं में पद्मश्री कैलाश खेर, गुरदास मान और पद्मश्री महाबीर गुड्डु जैसे कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से आगंतुकों का मनोरंजन करेंगे। हरियाणा की लोक कला और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय कलाकार पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति देंगे।

अवसंरचना और तैयारी:
पर्यटकों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए मेले के मैदान में लगभग 4.75 करोड़ रुपये की लागत से अवसंरचना विकास कार्य किए गए हैं। इसमें स्थल का सौंदर्यीकरण, रास्तों का चौड़ीकरण, 127 नई झोपड़ियों का निर्माण, पुरानी झोपड़ियों की मरम्मत और मनोरंजन क्षेत्र का विस्तार शामिल है।

आयुक्त एवं सचिव (विरासत और पर्यटन) अमित कुमार अग्रवाल ने कहा कि यह महोत्सव देश के कोने-कोने से कारीगरों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को जोड़ने का अवसर प्रदान करेगा और भारत की सांस्कृतिक एकता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेगा।

 

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