Tuesday, July 21

दिल्ली में 153 अवैध बोरवेल का नहीं चल पा रहा पता, प्रशासन के सामने खड़ी मुश्किल

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में भूजल के अवैध दोहन के खिलाफ चल रहे अभियान में प्रशासन को एक नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली में 153 अवैध बोरवेल ऐसे हैं, जिनका पता प्रशासन नहीं लगा पा रहा है। रिकॉर्ड में इनके पते, नाम और मोबाइल नंबर गलत दर्ज होने के कारण इन्हें सील करना मुश्किल हो गया है। यह जानकारी सेंट्रल ग्राउंड वॉटर अथॉरिटी (CGWA) ने हाल ही में नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में पेश की गई रिपोर्ट में दी है।

राजधानी में हुई थी 20 हजार से ज्यादा बोरवेल की पहचान
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली जल बोर्ड ने कुल 20,297 अवैध बोरवेल की पहचान की थी। इनमें से 15,962 बोरवेल संबंधित जिला अधिकारियों द्वारा सील किए जा चुके हैं, जबकि 3,875 बोरवेल को मालिकों ने स्वयं बंद कर दिया है। लेकिन गलत पते और जानकारी के कारण 153 बोरवेल का पता नहीं चल सका।

कोर्ट और प्रशासन का स्टेटस
रिपोर्ट में बताया गया है कि 142 बोरवेल को अभी सील करना बाकी है, 160 बोरवेल पर कोर्ट का स्टे है, जबकि 5 बोरवेल को डीएलएसी (DLAC) से मंजूरी प्राप्त है। दिल्ली में भूजल नियमन की शक्तियां उपराज्यपाल (LG) द्वारा ‘ग्राउंड वॉटर रेगुलेशन डायरेक्शन, 2010’ के तहत डीएम और एसडीएम को दी गई हैं।

भूजल संरक्षण में प्रशासन की भूमिका
दिल्ली जल बोर्ड केवल अवैध बोरवेलों की पहचान और रिपोर्ट करता है, जबकि सीलिंग की वास्तविक प्रक्रिया जिला अधिकारी (DM/SDM) पुलिस बल की मदद से पूरी करते हैं। वहीं, ‘एनवायरनमेंटल रिकवरी’ यानी पर्यावरणीय जुर्माना वसूलने की जिम्मेदारी भी जिला प्रशासन की ही है।

 

This slideshow requires JavaScript.

Leave a Reply

This slideshow requires JavaScript.