Tuesday, July 21

इश्क है तो रिस्क है: अब भारतीय FD नहीं, शेयर बाजार में ज्यादा निवेश कर रहे

 

 

नई दिल्ली: साल 2020 में आई वेब सीरीज ‘Scam 1992’ में हर्षद मेहता का किरदार दर्शकों के दिलों पर छा गया। इसमें प्रतीक गांधी ने एक डायलॉग कहा था—”इश्क है तो रिस्क है”। आज यही हाल भारतीय निवेशकों का भी हो गया है। रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अब भारतीय पारंपरिक एफडी जैसी सुरक्षित स्कीम में कम निवेश कर रहे हैं और शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड जैसी उच्च रिटर्न वाले, लेकिन रिस्की विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।

 

बचत का तरीका बदल रहा है

RBI की रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2012 में लोग अपनी कुल बचत का 57.9% हिस्सा बैंक जमा (FD या बचत खाता) में रखते थे। यह वित्त वर्ष 2025 में घटकर 35.2% रह गया। यानी अब लोग उच्च रिटर्न के लिए रिस्क लेने से हिचकिचा नहीं रहे।

 

शेयर बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी

कुल घरेलू वित्तीय संपत्तियों में शेयर और इन्वेस्टमेंट फंड की हिस्सेदारी मार्च 2025 तक 23% तक पहुंच गई, जबकि छह साल पहले यह केवल 15.7% थी। आम लोगों की डायरेक्ट इक्विटी होल्डिंग वित्त वर्ष 2014 में 8% से कम थी, जो सितंबर 2025 तक बढ़कर 9.6% हो गई। वहीं, म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश (इनडायरेक्ट हिस्सेदारी) तीन गुना बढ़कर 9.2% तक पहुंच गया।

 

सालाना घरेलू वित्तीय बचत में शेयर और म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2012 में लगभग 2% थी, जो वित्त वर्ष 2025 में 15.2% से अधिक हो गई। कुल इक्विटी होल्डिंग वित्त वर्ष 2014 में 8 लाख करोड़ रुपये थी, जो सितंबर 2025 तक बढ़कर लगभग 84 लाख करोड़ रुपये हो गई।

 

क्या लोग बैंक छोड़ रहे हैं?

विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट यह नहीं दिखाती कि लोग बैंकों को पूरी तरह छोड़ रहे हैं। बल्कि, अब लोग अपनी पारंपरिक बचत के साथ शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में भी निवेश कर रहे हैं। इसके विपरीत, कम जोखिम वाले बॉण्ड और अन्य सुरक्षित उत्पादों में निवेश घट रहा है।

 

निष्कर्ष: भारतीय निवेशक अब अधिक रिटर्न के लिए रिस्क लेने को तैयार हैं। यानी अगर आपको पैसा कमाना है, तो थोड़ा साहस और समझदारी के साथ शेयर बाजार में उतरना पड़ सकता है।

 

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