Tuesday, July 21

क्राइम पेट्रोल: पुलिस के बीट वर्क में ऐप्स और सीसीटीवी ला रहे बड़ा बदलाव

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में दिल्ली पुलिस अब पूरी तरह डिजिटल और हाई-टेक हो गई है। पुलिस के कामकाज के तरीके में पिछले कुछ सालों में कई बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं।

पुलिसिंग का डिजिटल रूप
1982 में फोर्स में भर्ती हुए बीट कांस्टेबल महावीर सिंह बताते हैं कि पहले थानों में फाइलों का लंबा ढेर रहता था, एफआईआर हाथ से लिखनी पड़ती थी और शिकायतों को रजिस्टर में दर्ज करना पड़ता था। बीट बदलने पर रिकॉर्ड नए अधिकारी को ट्रांसफर करना पड़ता था, और मुखबिरों और लोगों के साथ संबंधों को फिर से बनाना पड़ता था।

लेकिन 2025 तक आते-आते दिल्ली पुलिस में बड़ा बदलाव आया। डिजिटलाइजेशन के कारण अब ऐप्स और डेटाबेस ने बीट पुलिसिंग की पुरानी दिनचर्या पूरी तरह बदल दी है।

घंटों का काम मिनटों में
अफसर बताते हैं कि अब रजिस्टर की जगह डिजिटल स्क्रीन और ई-बीटबुक एप्लिकेशन से काम होता है। स्कूल, कॉलेज जैसी प्रमुख संस्थानों की जानकारी ऐप में स्टोर की जाती है और बीट ट्रांसफर होने पर दूसरे अधिकारी को तुरंत मिल जाती है।

कश्मीरी गेट पुलिस स्टेशन के हेड कांस्टेबल अजय दहिया कहते हैं कि प्रत्येक अधिकारी अपने कार्यकाल के दौरान ऐप अपडेट करता है, जिससे जानकारी आसानी से उपलब्ध हो जाती है। अब क्रिमिनल हिस्ट्री और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन भी आसान हो गया है।

बीट अधिकारी फोर्स की रीढ़
स्पेशल सीपी लॉ एंड ऑर्डर रविंद्र यादव का कहना है कि बीट अधिकारी फोर्स की रीढ़ हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के अनुसार मॉडर्न टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। DCP (नॉर्थ) राजा बंथिया ने कहा कि पेट्रोलिंग का मुख्य काम इलाके को अच्छी तरह जानना है, और टेक्नोलॉजी ने इसे तेज़ बनाने में मदद की है।

हालांकि कुछ पुलिसकर्मियों का मानना है कि डिजिटल टूल्स ने बीट पुलिसिंग बदल दी है, लेकिन इसमें सुधार की और भी गुंजाइश है।

 

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