Tuesday, July 21

निर्मला सीतारमण का यह बजट सबसे कम रोमांचक, बड़े सुधार की कमी का असर

 

 

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। उन्होंने लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ सही दिशा में है, लेकिन इस बार कोई बड़ा सुधार नहीं किया गया। उदाहरण के लिए यूरिया पर दी जा रही भारी सब्सिडी में कमी की संभावना थी, लेकिन इस बार वित्त मंत्री का जोर निरंतरता पर रहा।

 

निर्मला सीतारमण लगातार नौ बजट पेश करने वाली देश की पहली वित्त मंत्री हैं। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में 8% की मजबूत ग्रोथ के बीच इस बजट को साधारण कहा जा सकता है।

 

बाजार पर असर:

बजट के बाद निफ्टी 2% से अधिक गिरा। मुख्य वजह फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में भारी बढ़ोतरी रही। सरकार का उद्देश्य छोटे निवेशकों को वायदा बाजार से दूर रखना था, क्योंकि हाल के वर्षों में इनमें से 93% निवेशकों को नुकसान हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्स दरों में बढ़ोतरी से ट्रेडिंग की लागत बढ़ती है, जिससे छोटे निवेशकों के लिए नुकसान का खतरा बढ़ता है।

 

फिस्कल डेफिसिट और राजकोषीय सुधार:

इस बार भी फिस्कल कंसॉलिडेशन का सिलसिला जारी है। वित्त वर्ष 2026 में फिस्कल डेफिसिट जीडीपी के 4.41% और अगले साल 4.3% रहने का अनुमान है। केंद्र का डेब्ट-टू-जीडीपी रेश्यो 56.1% से घटकर 55.6% होने की उम्मीद है। केपेक्स अगले वित्त वर्ष में 12.2 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है, जो निवेश और विकास के लिए सकारात्मक संकेत है।

 

यूरिया सब्सिडी और सुधार की कमी:

विशेषज्ञों के अनुसार यूरिया पर भारी सब्सिडी के कारण इसकी खपत फॉस्फोरिक और पोटैशियम उर्वरकों के मुकाबले अधिक है, जिससे भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है। पहले प्रयास विफल रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने धीरे-धीरे सब्सिडी हटाकर सुधार किया था।

 

AI और टेक्नॉलजी निवेश:

बजट में भारत को AI डिवेलपमेंट में वैश्विक हब बनाने की पहल की गई। भारतीय डेटा सेंटर में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को 2047 तक टैक्स छूट दी जाएगी। हालांकि बड़े निवेशक पहले ही भारत में 67.5 अरब डॉलर का निवेश कर चुके हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अब गुणवत्ता सुधार पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

 

कंपनियों और शेयरधारकों के लिए बदलाव:

बायबैक पर कैपिटल गेन टैक्स और लॉन्ग टर्म/शॉर्ट टर्म निवेश पर टैक्स दरों में बदलाव किया गया है। मिनिमम ऑल्टरनेट टैक्स 15% से घटाकर 14% किया गया है और कैरी फॉरवर्ड प्राविजन समाप्त किया गया है। सरकारी कंपनियों की बिक्री से अगले वित्त वर्ष में 80,000 करोड़ रुपये की उम्मीद है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट स्थिरता पर जोर देता है, लेकिन बड़े सुधारों और उत्साहजनक घोषणाओं की कमी इसे सबसे कम रोमांचक बजट बनाती है।

 

 

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