Tuesday, July 21

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: पाकिस्तान से आए दलितों को सम्मानजनक आवास मुहैया करवाएं, दिल्ली में अतिक्रमण हटाओ मुहिम रोकी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान से उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आए दलितों की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि केवल भारतीय नागरिकता देना ही पर्याप्त नहीं है, सरकार को ऐसे लोगों के लिए आवास और पुनर्वास की सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होंगी।

अतिक्रमण हटाओ मुहिम पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज के पास मजनूं का टिला इलाके में अतिक्रमण हटाने की किसी भी नई मुहिम या विकास परियोजनाओं पर रोक लगा दी है, जिससे दलित परिवारों के विस्थापन का संकट टल सके। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह चार हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करे।

250 दलित परिवारों को मिली राहत
अदालत के इस आदेश से लगभग 250 दलित परिवारों, जिनमें करीब 1,000 लोग शामिल हैं, को बड़ी राहत मिली है। ये परिवार पाकिस्तान से आए थे और वर्षों तक शरणार्थी जीवन बिताने के बाद नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत भारतीय नागरिक बने। अब उनकी सुरक्षा और स्थायी आवास सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सरकार पर है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता मिलने के बावजूद यदि ऐसे परिवारों के सामने विस्थापन का खतरा रहेगा तो उनके मूलभूत अधिकारों का हनन होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि पाकिस्तान से आए दलित परिवार सम्मानजनक जीवन जी सकें।

इस आदेश से दिल्ली में विस्थापित दलित परिवारों को स्थायी सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का भरोसा मिला है, जबकि सरकार अब अदालत के सामने जवाबदेह है कि नागरिकता देने के बाद इन परिवारों को बसाने की क्या योजना है।

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