Tuesday, July 21

भारत का नया ‘बाहुबली’: 4×4 ट्रक पर सवार 155mm 52-कैलिबर आर्टिलरी गन, दुश्मन पर बरसेगी बारूद की बारिश

नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर बढ़ते सैन्य तनाव और सीमाओं पर बने हालात के बीच भारत ने अपनी तोपखाना शक्ति में ऐतिहासिक बढ़त हासिल की है। भारतीय कंपनी कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड (KSSL) ने दुनिया की पहली ऐसी 155mm 52-कैलिबर आर्टिलरी गन विकसित की है, जिसे 4×4 ट्रक पर तैनात किया जा सकता है। यह उपलब्धि भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान देती है।

दुनिया में पहली बार ऐसा कॉम्बिनेशन

अब तक इतनी लंबी दूरी और मारक क्षमता वाली हेवी होवित्जर तोपों के लिए 6×6 या 8×8 प्लेटफॉर्म की जरूरत होती थी। लेकिन KSSL ने हाइब्रिड रिकॉइल टेक्नोलॉजी के जरिए इस असंभव माने जाने वाले लक्ष्य को हासिल कर लिया है। यह तकनीक फायरिंग के दौरान पैदा होने वाले भारी रिकॉइल को प्रभावी ढंग से सोख लेती है, जिससे हल्का 4×4 प्लेटफॉर्म भी स्थिर और सुरक्षित बना रहता है।

हल्की, तेज और ज्यादा घातक

इस आर्टिलरी गन को पारंपरिक स्टील की जगह हाई-स्ट्रेंथ एल्यूमीनियम से तैयार किया गया है, जिससे इसका वजन घटकर करीब 24 टन रह गया है। यह इस श्रेणी की तोपों में बेहद हल्की मानी जा रही है।

इसमें ऑटोमैटिक गोला-बारूद हैंडलिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे सैनिकों पर शारीरिक दबाव कम होता है और युद्ध के दौरान फायरिंग की गति बनी रहती है। यह तोप प्रति मिनट 5 राउंड तक फायर करने में सक्षम है, जो इसे बेहद घातक बनाती है।

डिजिटल टेस्टिंग से लेकर लाइव ट्रायल तक

इस ‘बाहुबली’ आर्टिलरी सिस्टम की डिजिटल इंजीनियरिंग और सिमुलेशन टेस्टिंग पूरी हो चुकी है। अब इसे ओडिशा के बालासोर फील्ड फायरिंग रेंज में लाइव फायर ट्रायल के लिए तैयार किया गया है। इन परीक्षणों में तोप की सटीकता, संरचनात्मक मजबूती और रिकॉइल मैनेजमेंट का कड़ा मूल्यांकन किया जाएगा।

भारतीय सेना की ताकत में बड़ा इजाफा

4×4 ट्रक पर सवार यह 155mm 52-कैलिबर आर्टिलरी गन न केवल तेजी से तैनाती में सक्षम है, बल्कि दुर्गम इलाकों में भी प्रभावी कार्रवाई कर सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिस्टम भारतीय सेना को भविष्य के युद्धों में निर्णायक बढ़त दिलाने वाला साबित हो सकता है।

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