Tuesday, July 21

भारत-यूरोप फ्री ट्रेड डील: पाकिस्तानी विशेषज्ञ ने दी चेतावनी, कहा – नहीं तो आएगी तबाही

इस्लामाबाद: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच “मदर ऑफ ऑल फ्री ट्रेड डील” ने पाकिस्तान में हलचल मचा दी है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी इस डील से उत्पन्न होने वाले आर्थिक दबाव से चिंतित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के मुकाबले पाकिस्तान वैश्विक व्यापार में पिछड़ रहा है और यदि उसने यूरोपीय संघ के साथ तत्काल व्यापक ट्रेड समझौता नहीं किया, तो इसका खामियाजा भारी होगा।

पाकिस्तानी विशेषज्ञ की चेतावनी
इंटरनेशनल ट्रेड विशेषज्ञ शमसुल इस्लाम खान ने पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून में लिखा कि भारत-यूरोप की ट्रेड डील वैश्विक वाणिज्य का परिदृश्य बदल रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ के कारण भारत के टेक्सटाइल और वस्त्र निर्यात पर असर पड़ा था। इसके चलते यूरोपीय बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ रही है और पाकिस्तानी निर्यातकों के लिए चुनौती पैदा हो रही है।

विशेषज्ञ ने चेताया कि यूरोपीय संघ भारत को एफटीए के तहत छूट देता है, तो पाकिस्तान का निर्यात मार्जिन कम हो जाएगा। इसमें बासमती चावल, गार्मेंट्स, शर्ट, जींस, तौलिए और बेडशीट शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने पहले ही ब्रिटेन, यूएई और इजरायल के साथ एफटीए कर लिया है, जबकि पाकिस्तान बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ समझौता करने में पीछे रह गया है।

पाकिस्तान में नौकरी संकट
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पाकिस्तान ने समय रहते यूरोपीय संघ के साथ ट्रेड डील नहीं की, तो 1 करोड़ से अधिक नौकरियों के खतरे को बढ़ावा मिलेगा। यह डील पाकिस्तान के निर्माण और निर्यात क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकती है।

पूर्व राजनयिक का विश्लेषण
पाकिस्तान की पूर्व राजनयिक मलीहा लोधी ने डॉन में लिखा कि भारत-यूरोप डील या चीन-कनाडा समझौते से स्पष्ट हो गया है कि वैश्विक व्यापार का तरीका बदल रहा है। उन्होंने कहा कि दक्षिण-दक्षिण देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ रहा है और अब यह विश्व व्यापार का एक चौथाई हिस्सा बन चुका है। भारत इस ग्लोबल साउथ का अहम हिस्सा बनकर उभरा है।

भारत का मास्टर स्ट्रोक
अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ और व्यापारिक दबाव के बीच भारत ने यूरोप के साथ यह ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील कर दुनिया को संदेश दिया कि वह वैश्विक बाजार में निर्णायक शक्ति के रूप में खड़ा है। वहीं, पाकिस्तान के लिए यह चुनौती बनकर उभरी है, जिसे निपटाने के लिए विशेषज्ञ तत्काल कदम उठाने की सलाह दे रहे हैं।

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