Tuesday, July 21

एससी-एसटी एक्ट पर विवाद: अलंकार अग्निहोत्री का आंदोलन ऐलान, जानें सजा के प्रावधान

वाराणसी: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act) का मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है। बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने वाराणसी से इस कानून के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है।

अलंकार अग्निहोत्री ने केदारघाट में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से आशीर्वाद लेने के बाद कहा कि यदि 6 फरवरी तक इस कानून में संशोधन नहीं किया गया तो 7 फरवरी को वे दिल्ली कूच करेंगे और पूरे देश में आंदोलन करेंगे। उन्होंने दावा किया कि एससी-एसटी एक्ट से देश के 85 प्रतिशत लोग प्रभावित हैं और इसके तहत दर्ज होने वाले 95 प्रतिशत केस फर्जी होते हैं।

एससी-एसटी एक्ट क्या है?

एससी-एसटी एक्ट का उद्देश्य अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के खिलाफ होने वाले भेदभाव, हिंसा और अत्याचारों को रोकना है। इस कानून के तहत जाति के आधार पर अपमान, शोषण, जबरन मजदूरी, संपत्ति कब्जा और यौन अपराध जैसे 22 प्रकार के अत्याचारों पर कार्रवाई की जा सकती है। पीड़ितों को न्याय, मुआवजा और पुनर्वास दिलाने के लिए विशेष प्रावधान हैं।

एक्ट के प्रमुख प्रावधान

  • तत्काल कार्रवाई: एफआईआर दर्ज होते ही आरोपी की गिरफ्तारी का प्रावधान।

  • विशेष अदालतें: तेजी से सुनवाई के लिए जिला स्तर पर विशेष एससी-एसटी अदालतें।

  • धारा 2: ‘अत्याचार’, ‘लोक सेवक’, ‘अनुसूचित जाति’ और ‘अनुसूचित जनजाति’ की परिभाषा।

  • धारा 3: जाति के आधार पर अपमान, गाली या शारीरिक नुकसान पहुंचाने पर सजा।

  • धारा 4: लोक सेवक अपने कर्तव्य का पालन न करने पर दंडनीय।

  • धारा 15: विशेष अदालतों के गठन का प्रावधान।

  • धारा 18 और 19: अग्रिम जमानत और प्रोबेशन पर रिहाई पर रोक।

  • धारा 21: पीड़ितों को मुआवजा और पुनर्वास।

सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल जाति का नाम लेना या अकेले में बात करना अपराध नहीं है। इसके लिए ‘मंशा’ यानी अपमान करने का इरादा साबित होना जरूरी है। झूठा मामला दर्ज कराने पर 10 साल तक की जेल और जुर्माना, साथ ही मुआवजा वसूलने का प्रावधान है।

अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि देश में इस कानून का दुरुपयोग हो रहा है और इसे तत्काल संशोधित करने की आवश्यकता है।

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