Tuesday, July 21

पाकिस्तान में लीबिया के आर्मी चीफ और प्रधानमंत्री, असीम मुनीर संग लंबी बैठक—क्या 4 अरब डॉलर की हथियार डील हुई पक्की?

पाकिस्तान और लीबिया के बीच रक्षा सहयोग को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। लीबियाई नेशनल आर्मी के कमांडर फील्ड मार्शल खलीफा हफ्तार और लीबिया की पूर्वी सरकार के प्रधानमंत्री ओसामा साद हम्माद ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से रावलपिंडी में लंबी बैठक की है। इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच कथित 4 अरब डॉलर की हथियार डील से जोड़कर देखा जा रहा है।

पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग के अनुसार, बैठक के दौरान सैन्य सहयोग, रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि किसी भी पक्ष ने अभी तक इस कथित डील की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

4 अरब डॉलर की डील पर चर्चा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बैठक जनरल असीम मुनीर की दिसंबर में लीबिया के बेंगाजी दौरे के करीब छह हफ्ते बाद हुई है। उस दौरान पाकिस्तान और लीबिया की पूर्वी सेना के बीच एक बड़े रक्षा समझौते को अंतिम रूप दिए जाने का दावा किया गया था। बताया जा रहा है कि यह डील 4 अरब डॉलर से अधिक की हो सकती है, जो पाकिस्तान के अब तक के सबसे बड़े हथियार निर्यात समझौतों में शामिल होगी।

प्रस्तावित समझौते के तहत पाकिस्तान, चीन के सहयोग से विकसित किए गए 16 JF-17 थंडर मल्टी-रोल फाइटर जेट, 12 मुश्शक ट्रेनर एयरक्राफ्ट और थल व नौसेना बलों के लिए ड्रोन तथा अन्य सैन्य उपकरण लीबिया को सप्लाई कर सकता है। अगर यह सौदा लागू होता है, तो किसी अरब देश को JF-17 फाइटर जेट का यह पहला निर्यात होगा।

संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध बड़ी बाधा

हालांकि इस संभावित डील को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। लीबिया पर वर्ष 2011 से संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध लागू हैं। इन प्रतिबंधों के तहत किसी भी हथियार ट्रांसफर के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष मंजूरी आवश्यक होती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान या लीबिया ने इस प्रतिबंध से छूट के लिए औपचारिक आवेदन किया है या नहीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना संयुक्त राष्ट्र की अनुमति इस तरह की डील को अमली जामा पहनाना मुश्किल होगा।

असीम मुनीर की सक्रियता

पिछले कुछ समय से पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर लीबिया के साथ रक्षा संबंध मजबूत करने में खासे सक्रिय नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है और हथियार निर्यात को विदेशी मुद्रा कमाने के एक अहम साधन के तौर पर देखा जा रहा है। इसी रणनीति के तहत पाकिस्तान अफ्रीकी और अरब देशों में अपने रक्षा उत्पादों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि आलोचकों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पाकिस्तानी नेतृत्व ने अपनी सैन्य तकनीक को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर दावे भी किए हैं। दिसंबर में लीबिया दौरे के दौरान असीम मुनीर द्वारा JF-17 लड़ाकू विमान को पूरी तरह स्वदेशी बताने के दावे पर भी सवाल उठे थे, क्योंकि यह विमान चीन के सहयोग से विकसित किया गया है।

क्षेत्रीय और वैश्विक नजर

लीबिया के साथ पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों और लीबिया की अस्थिर राजनीतिक स्थिति के चलते यह देखना अहम होगा कि यह कथित 4 अरब डॉलर की डील वास्तव में जमीन पर उतरती है या नहीं।

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