Tuesday, July 21

भारत को 500% टैरिफ की धमकी देने वाले लिंडसे ग्राहम की पलटी, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर ट्रंप की खुलकर तारीफ

कुछ महीने पहले तक भारत को 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी देने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम अब सुर पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की घोषणा के बाद ग्राहम ने न सिर्फ अपना रुख नरम किया है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जमकर तारीफ भी की है। ग्राहम ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने के फैसले को “शानदार कदम” बताया है।

लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का यह फैसला रूस पर दबाव बढ़ाने की दिशा में अहम है। उन्होंने लिखा कि ट्रंप का संदेश अब असर दिखाने लगा है और इससे वे देश भी दोबारा सोचने को मजबूर होंगे, जो रूस की युद्ध मशीन को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे रहे हैं।

भारत के कदम से रूस पर बढ़ेगा दबाव
ग्राहम ने आगे कहा कि भारत ने अपने व्यवहार और कूटनीतिक संतुलन के दम पर अमेरिकी टैरिफ में बड़ी राहत हासिल की है। उन्हें उम्मीद है कि रूस से तेल खरीदने वाले अन्य बड़े देश भी भारत के रास्ते पर चलेंगे। ग्राहम के मुताबिक, जब रूस को पर्याप्त “दर्द” महसूस होगा, तभी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बातचीत की मेज पर आएंगे। उन्होंने कहा कि अभी मंज़िल दूर है, लेकिन भारत के कदम ने उस दिशा में दूरी कम कर दी है।

पहले भारत के सबसे बड़े आलोचक थे ग्राहम
गौरतलब है कि बीते साल भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर तनातनी अपने चरम पर थी। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जबकि लिंडसे ग्राहम ने इससे भी आगे बढ़ते हुए भारत पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने की मांग कर दी थी। ग्राहम ने भारत पर रूस की मदद करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए थे और बेहद कठोर भाषा का इस्तेमाल किया था।

अब बदला सुर, बदली राजनीति
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के ऐलान के बाद ग्राहम का बदला हुआ रुख साफ दिख रहा है। जो नेता कुछ समय पहले भारत की अर्थव्यवस्था को “बर्बाद करने” की धमकी दे रहा था, वही अब भारत के साथ व्यापार समझौते को अमेरिका की रणनीतिक जीत बता रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पलटी केवल ग्राहम की नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक हालात में अमेरिका की मजबूरी और भारत की बढ़ती आर्थिक-रणनीतिक ताकत का संकेत है। भारत ने एक बार फिर दिखा दिया है कि कड़े दबाव के बीच भी संतुलित कूटनीति कैसे बड़े फैसलों को अपने पक्ष में मोड़ सकती है।

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