Tuesday, July 21

‘जननायक की उपाधि हथियाना चाहते थे राहुल गांधी’ — केसी त्यागी का कांग्रेस पर कड़ा प्रहार

पटना: जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कांग्रेस और खासकर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि बिहार में विपक्षी गठबंधन की हार केवल एनडीए सरकार की नीतियों का समर्थन नहीं, बल्कि राहुल गांधी द्वारा समाजवादी दिग्गज और पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की ‘जननायक’ उपाधि को हथियाने की कोशिश के प्रति जनता का आक्रोश भी है।

“राहुल गांधी ने जननायक की उपाधि हथियाने की कोशिश की” — त्यागी

केसी त्यागी ने कहा कि कांग्रेस को “वोट चोरी” जैसे आरोप लगाने से पहले यह समझना चाहिए कि सामाजिक न्याय के मुद्दों पर उनके “अवसरवादी उपदेशों” को जनता स्वीकार नहीं कर रही। उन्होंने कहा—

“राहुल और कांग्रेस ने कर्पूरी ठाकुर की ‘जननायक’ उपाधि को खुलेआम हथियाने की कोशिश की। लेकिन बिहार की जनता ने इस प्रयास को सिरे से नकार दिया। कर्पूरी जी को यह उपाधि उनके पांच दशक की जनसेवा और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के लिए किए गए संघर्ष के सम्मान में दी गई थी।”

त्यागी ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस की चुनावी रणनीति ही उलटी पड़ गई, क्योंकि बिहार के लोग अपने ऐतिहासिक नेताओं की विरासत के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करते।

“कर्पूरी ठाकुर की उपाधि कोई नहीं छीन सकता” — जनता का संदेश

इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में त्यागी ने कहा—

“राहुल को जननायक के रूप में पेश करने के कांग्रेस के प्रयास ने बिहार के लोगों को नाराज़ किया। जनता ने साफ संदेश दे दिया है कि कर्पूरी ठाकुर की उपाधि से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी।”

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई ‘बापू’ (महात्मा गांधी) या ‘लोकनायक’ (जयप्रकाश नारायण) की उपाधियों पर दावा करेगा, तो उसका भी वही हश्र होगा जो कांग्रेस का हुआ है।

कांग्रेस की ओबीसी राजनीति पर भी सवाल

छात्र जीवन से समाजवादी राजनीति से जुड़े रहे त्यागी ने कांग्रेस की ओबीसी राजनीति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा—

  • 1978 में कर्पूरी ठाकुर ने बिहार में ओबीसी, ईबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए आरक्षण लागू किया, कांग्रेस ने इसका विरोध किया
  • केंद्र में कांग्रेस की सरकारों ने मंडल आयोग की सिफारिशों को वर्षों तक दबाए रखा
  • वीपी सिंह सरकार द्वारा मंडल लागू करने पर राजीव गांधी ने कांग्रेस के विरोध का नेतृत्व किया
  • यूपीए सरकार के दस वर्षों में, जब राहुल प्रभावी थे, कांग्रेस ने न कभी जाति जनगणना कराई,
    न ओबीसी कोटे को 50% से ऊपर ले जाने का प्रयास,
    न आरक्षण को 9वीं अनुसूची में शामिल करने की वकालत की।

त्यागी ने कहा कि समाजवादी दल दशकों से इन मुद्दों के लिए लड़ते रहे हैं, जबकि कांग्रेस का रुख हमेशा अवसरवादी रहा है।

“राहुल की सामाजिक न्याय वाली राजनीति को जनता ने खोखला बताया”

त्यागी ने कहा कि जब कांग्रेस की सभी रणनीतियाँ विफल हो गईं, तब राहुल गांधी ने खुद को सामाजिक न्याय का चैंपियन बताने की कोशिश की। लेकिन जनता ने इसे गंभीरता से नहीं लिया—

“जो राहुलजी पहले ‘जनेऊधारी’ की राजनीति करते थे, वही अचानक सामाजिक न्याय के प्रतीक बनना चाहते थे। मतदाताओं ने इस तस्वीर को नकार दिया। यहां तक कि कांग्रेस के अपने नेता भी इस narrative से सहमत नहीं थे।”

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