Tuesday, July 21

बंगाल चुनाव में बीजेपी की सामाजिक रणनीति, बिहार के नेताओं को मिली प्रचार की जिम्मेदारी

पटना: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सामाजिक समीकरणों पर आधारित रणनीति तेज कर दी है। पार्टी ने बिहार के विभिन्न जाति समूहों में प्रभाव रखने वाले वरिष्ठ नेताओं को चुनाव प्रचार में उतारने की योजना बनाई है, ताकि प्रवासी बिहारी मतदाताओं और सामाजिक आधार को अपने पक्ष में संगठित किया जा सके।

भाजपा रणनीतिकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल के कई इलाकों, खासकर उत्तरी बंगाल में बड़ी संख्या में बिहार और उत्तर प्रदेश से गए प्रवासी मतदाता रहते हैं, जिनकी सामाजिक पहचान चुनावी रुझानों को प्रभावित कर सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग समुदायों में प्रभाव रखने वाले नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

यादव समुदाय के बीच पैठ मजबूत करने के लिए पूर्व मंत्री रामसूरत राय को प्रचार की कमान दी गई है। भूमिहार और ब्राह्मण मतदाताओं के बीच संपर्क अभियान के लिए देवेश मिश्रा और पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, समन्वय की व्यापक भूमिका में वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय सक्रिय बताए जा रहे हैं।

कायस्थ समुदाय तक पहुंच बनाने के लिए प्रदेश महासचिव राजेश वर्मा को मैदान में उतारा गया है, जबकि वैश्य समाज के बीच संवाद बढ़ाने की जिम्मेदारी पूर्व विधायक मिथिलेश कुमार को दी गई है। दलित और आदिवासी मतदाताओं के बीच संगठनात्मक मजबूती के लिए जगन्नाथ ठाकुर और पूर्व विधायक निकी हेंब्रम को सक्रिय किया गया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा की विशेष नजर उत्तरी बंगाल की करीब 31 विधानसभा सीटों पर है। इन क्षेत्रों में प्रवासी मतदाताओं और सामाजिक समीकरणों को साधकर चुनावी बढ़त हासिल करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। सीमावर्ती इलाकों और शहरी क्षेत्रों में संगठन विस्तार और बूथ स्तर पर नेटवर्क मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की यह रणनीति सामाजिक पहचान और प्रवासी वोट बैंक को साधने की कोशिश का हिस्सा है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह प्रयोग चुनावी नतीजों में कितना असर डालता है।

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