Tuesday, July 21

राजा भैया को बड़ी राहत: दिल्ली कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान लेने से किया इनकार

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को पत्नी उत्पीड़न के मामले में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को राजा भैया के खिलाफ दायर आरोप पत्र (चार्जशीट) पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि बहुत पुराने आरोपों को आधार बनाकर आपराधिक कानून का उपयोग नहीं किया जा सकता, जब तक हाल के समय में क्रूरता से जुड़ा कोई स्पष्ट कृत्य सामने न आया हो।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कथित पुरानी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने से शिकायतकर्ता को कोई मदद नहीं मिलेगी।

कोर्ट ने कहा- समयसीमा के कारण आरोप वैध नहीं

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार दिल्ली पुलिस की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 498A (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा विवाहित महिला के साथ क्रूरता) के तहत दायर अंतिम रिपोर्ट पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया गया था।

मजिस्ट्रेट ने कहा कि अदालत इस बात से संतुष्ट नहीं है कि धारा 498A के तहत अपराध के आवश्यक पहलू प्रारंभिक तौर पर स्पष्ट रूप से साबित हो रहे हैं। साथ ही अदालत ने यह भी माना कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप समयसीमा (Limitation Period) के कारण अब वैध नहीं माने जा सकते।

अदालत बोली- पुराने मामलों को दोहराने का औचित्य नहीं

कोर्ट ने कहा कि कथित अपराध का संज्ञान लेने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत के अनुसार प्राथमिकी में शारीरिक हिंसा और स्पष्ट क्रूरता के आरोप मुख्य रूप से 2015 की घटना से जुड़े हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि शादी के शुरुआती वर्षों यानी 1995 से लेकर 2015 तक शारीरिक क्रूरता का कोई आरोप सामने नहीं आया, और 2015 में पहली बार कथित मारपीट की बात दर्ज की गई है।

एफआईआर दर्ज कराने में भी रहा लंबा अंतराल

कोर्ट ने उल्लेख किया कि यह प्राथमिकी मार्च 2025 में दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव थाने में दर्ज कराई गई थी, जबकि कथित घटनाएं कई वर्ष पुरानी थीं। अदालत ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने में काफी लंबा अंतराल हो चुका था।

2017 से 2025 तक अलग रह रहे थे दोनों पक्ष

अदालत ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए यह भी कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने से पहले दोनों पक्ष कई वर्षों तक, यानी 2017 से 2025 के बीच, अलग-अलग रह रहे थे। इस तथ्य को भी अदालत ने मामले में महत्वपूर्ण माना।

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