Tuesday, July 21

लीबिया के तानाशाह गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम की हत्या: पिता की तरह ही क्रूर, विपक्षियों को कहते थे ‘चूहे’

त्रिपोली: उत्तरी अफ्रीका के क्रूर तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी को उनके घर में घुसकर गोलियों से भून दिया गया। सैफ 53 साल के थे और उन्हें एक समय अपने पिता के बाद लीबिया का सबसे प्रभावशाली शख्स माना जाता था। उनके कार्यालय ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि ज़िंटान में चार अज्ञात बंदूकधारियों ने हमला किया और उनकी हत्या कर दी

सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी को अपने पिता से अलग, उदारवादी और पश्चिमी-अनुकूल नेता माना जाता था। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की थी और फर्राटेदार अंग्रेज़ी बोलने में माहिर थे। कई अंतरराष्ट्रीय सरकारों की नजर में वे लीबिया का स्वीकार्य चेहरा थे।

लेकिन 2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान विद्रोह भड़का, तो सैफ ने अपने कबीले की वफादारी दिखाई और विरोधियों पर क्रूर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार बने। उन्हें प्रदर्शनकारियों के कत्लेआम और उनके सुरक्षा बलों को अंधाधुंध फायरिंग के आदेश देने का आरोप था। वे अपने विरोधियों को तुच्छ मानकर ‘चूहे’ कहते थे।

सैफ को 2015 में फांसी की सजा भी सुनाई गई थी, लेकिन 2017 में स्थानीय मिलिशिया के आम माफी कानून के तहत उन्हें रिहा किया गया। त्रिपोली की सरकार ने इस माफी को अवैध करार दिया था।

सैफ अल-इस्लाम ने अपने पिता की नीतियों में योगदान दिया और संवेदनशील डिप्लोमेटिक मिशनों में मध्यस्थता की। उन्होंने लीबिया के विनाशक हथियार छोड़ने वाली टीम का नेतृत्व किया और 1988 में स्कॉटलैंड में पैन एम फ्लाइट 103 बमबारी में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए मुआवजे की बातचीत भी की।

लेकिन उनका व्यक्तित्व अपने पिता की तरह ही क्रूर और विवादित था। उन्हें आधुनिक और सुधारक दिखने की कोशिश के बावजूद अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।

सैफ अल-इस्लाम की हत्या से लीबिया में राजनीतिक अस्थिरता और गृहयुद्ध की आग और भी भड़क सकती है। देश अब भी अपने भविष्य और स्थिरता की तलाश में संघर्षरत है।

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