Tuesday, July 21

स्वीडन के ग्रिपेन फाइटर जेट ने राफेल को छोड़ा पीछे, कोलंबिया ने फ्रांसीसी विमान को रेस से बाहर किया

बोगोटा: कोलंबिया ने फ्रांस को बड़ा झटका देते हुए राफेल लड़ाकू विमान खरीदने से इनकार कर दिया और स्वीडन के ग्रिपेन E/F फाइटर जेट को चुन लिया। कोलंबिया पहले राफेल खरीदने पर विचार कर रहा था, लेकिन तकनीकी, वित्तीय और रणनीतिक कारणों से ग्रिपेन को बेहतर विकल्प माना।

कोलंबिया और स्वीडन के बीच 14 नवंबर 2025 को समझौते पर साइन किया गया। इसके तहत 17 नए ग्रिपेन लड़ाकू विमानों की खरीद होगी – 15 सिंगल-सीट ग्रिपेन E और 2 ट्विन-सीट ग्रिपेन F। डील में तकनीकी-ऑपरेशनल ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और हथियार शामिल हैं, जिसकी कीमत करीब 220 मिलियन डॉलर प्रति विमान है।

राफेल क्यों हुआ बाहर:
ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया कि राफेल की कीमत अधिक होने के साथ-साथ किसी भी कंपोनेंट का टेक्नोलॉजी ट्रांसफर फ्रांस तैयार नहीं था। वहीं, स्वीडिश ग्रिपेन डील में सेंसर, एवियोनिक्स, हथियार और इंफ्रास्ट्रक्चर सहित कई महत्वपूर्ण तकनीकी हस्तांतरण शामिल थे। इसी वजह से कोलंबिया ने ग्रिपेन को सबसे पारदर्शी और फायदेमंद ऑफर माना।

पेमेंट की शर्तें:
कोलंबिया और स्वीडन के समझौते के मुताबिक कुल राशि का 40% छह अलग-अलग एडवांस पेमेंट के रूप में 2026 से 2031 के बीच दिया जाएगा। शेष 60% भुगतान फाइटर जेट की डिलीवरी के समय 2028 से 2032 के बीच किया जाएगा।

अमेरिका की भूमिका:
हालांकि डील में अमेरिका से आने वाले क्रिटिकल कंपोनेंट शामिल हैं। चूंकि डोनाल्ड ट्रंप और कोलंबिया के संबंध खराब हैं, इसलिए अमेरिका द्वारा वीटो लगाने की संभावना भी बनी हुई है।

इस डील से साफ हो गया है कि तकनीकी, लागत और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की शर्तों ने फ्रांस के राफेल को कोलंबिया की पसंद से बाहर कर दिया और स्वीडिश ग्रिपेन को विजय दिलाई।

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