Tuesday, July 21

पश्चिमी ‘चैरिटी’ नहीं, भारतीय ‘सेवा’ ही राष्ट्र का आधार: डॉ. मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि जो सत्य पहले से विद्यमान है, उसे किसी प्रमाण की दरकार नहीं होती। जैसे सूर्य पूर्व से ही उदय होता है, उसी तरह भारत का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्वरूप भी पहले से विद्यमान है।

डॉ. भागवत बुधवार को खरगोन जिले की कसरावद तहसील के ग्राम लेपा स्थित श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में आयोजित विचार-प्रेरक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन निमाड़ अभ्युदय रूरल मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन एवं श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने ‘मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ विषय पर अपने विचार रखे।

भारतीय संस्कृति में सेवा का महत्व

सरसंघचालक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में चैरिटी नहीं बल्कि सेवा का भाव है। सभी मनुष्य परमेश्वर के स्वरूप हैं, इसलिए उपकार नहीं, बल्कि सेवा करना हमारा धर्म है। सेवा से व्यक्ति की आत्मा शुद्ध होती है और प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार समाज के लिए योगदान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दूसरों की उपेक्षा कर सुख प्राप्त नहीं किया जा सकता। भारत की सभ्यता सिखाती है कि सच्चा सुख बाहर नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर है। आध्यात्मिक परंपरा ने मनुष्य को आत्मअन्वेषण की दिशा दी, जिससे शाश्वत सुख की प्राप्ति होती है।

शिक्षा का उद्देश्य विश्व मानवता का बोध कराना होना चाहिए

डॉ. भागवत ने शिक्षा पर बोलते हुए कहा कि जन्मांतर का ज्ञान मनुष्य के मस्तिष्क में निहित होता है और शिक्षा का उद्देश्य इसी अंतर्निहित ज्ञान को बाहर लाना है। उन्होंने टंट्या मामा और गाडगे महाराज जैसे समाज सुधारकों के उदाहरण से स्पष्ट किया कि वास्तविक शिक्षा वही है जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाए, विश्व मानवता का बोध कराए और श्रम की प्रतिष्ठा सिखाए।

उन्होंने कहा कि भारत का स्वभाव व्यक्ति से अधिक कर्म को महत्व देता है और केवल मानव विकास नहीं बल्कि जल, जंगल, नदी, पहाड़, पशु और मानव-सभी का समग्र विकास राष्ट्र की उन्नति का अर्थ है। इस अवसर पर ‘गोष्ट-नर्मदालयाची’ ऑडियोबुक का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पद्मश्री महेश शर्मा, नर्मदा न्यास के अध्यक्ष नितिन कर्माकर सहित करीब 300 आमंत्रित अतिथि उपस्थित थे।

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