Tuesday, July 21

चीन ने ईवी के मोर्चे पर किया बड़ा कमाल, भारत को अभी कई साल लगेंगे

नई दिल्ली: चीन ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। पहली बार देश में ईवी की बिक्री पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों से अधिक हो गई है। पिछले साल चीन में 13.1 मिलियन इलेक्ट्रिक गाड़ियां बिकीं, जबकि पेट्रोल-डीजल कारों की बिक्री 12.3 मिलियन यूनिट रही, जो पिछले 15 साल में सबसे कम है।

पेट्रोल-डीजल से चलने वाली कारों की बिक्री में लगातार आठवें साल गिरावट आई है। 2017 में यह बिक्री अपने पीक पर थी, लेकिन तब से अब तक 49% यानी 11.6 मिलियन यूनिट की कमी हुई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 तक चीन में ईवी की बिक्री 21.2 मिलियन यूनिट तक पहुंच सकती है, जबकि पेट्रोल-डीजल कारों की बिक्री घटकर 4.9 मिलियन यूनिट रह सकती है।

चीन की BYD कंपनी ने पिछले साल पहली बार एलन मस्क की टेस्ला से अधिक वाहन का उत्पादन किया। टेस्ला केवल ईवी बनाती है, जबकि BYD ईवी और प्लग-इन हाइब्रिड दोनों का उत्पादन करती है।

भारत की स्थिति

चीन की तुलना में भारत को ईवी के क्षेत्र में अभी लंबा रास्ता तय करना है। भारत में पिछले साल 2.3 मिलियन ईवी यूनिट्स बिकीं, जो कुल नए वाहन रजिस्ट्रेशन का केवल 8% हैं। इनमें:

  • दो-पहिया वाहन: 1.28 मिलियन (57%)

  • तीन-पहिया वाहन: 0.8 मिलियन (35%)

  • कारें: 1.75 लाख यूनिट

उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा ईवी मार्केट बना, जहां 4 लाख से अधिक ईवी बिके। वहीं, दिल्ली, केरल और गोवा में ईवी अपनाने की दर अधिक रही।

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