Tuesday, July 21

गाजियाबाद घटना के बाद दिशा-निर्देश: पांचवीं तक के बच्चों का होमवर्क मोबाइल पर नहीं

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन सगी बहनों के कोरियन गेम्स और डिजिटल लत के प्रभाव में आत्महत्या करने की घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। इस मामले को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने संज्ञान लिया है और सभी जिलों के डीएम को निर्देश जारी किए हैं कि पांचवीं तक के बच्चों का होमवर्क और असाइनमेंट मोबाइल या व्हाट्सऐप पर नहीं भेजा जाए।

महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने पत्र में कहा है कि गाजियाबाद की घटना पूरे समाज और शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। कोरोना काल में स्कूलों ने मजबूरी में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करवाई थी, लेकिन अब हालात सामान्य होने के बावजूद बच्चों को मोबाइल के माध्यम से होमवर्क भेजा जा रहा है। इससे बच्चों में डिजिटल लत बढ़ रही है, जो उनके मानसिक और शैक्षणिक विकास के लिए हानिकारक है।

डॉ. बबीता चौहान ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक कार्य स्कूल में ही कराए जाएं और मोबाइल पर पढ़ाई का प्रावधान बंद किया जाए। उन्होंने इसे समाज और शिक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी के रूप में माना।

समाजशास्त्री प्रो. रणधीर कुमार सिंह का कहना है कि बच्चों को कलम-कॉपी के साथ पढ़ाई कराना उन्हें सही आदत डालता है। मोबाइल पर स्क्रीन की रोशनी में पढ़ाई से बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई की जरूरत थी, लेकिन अब क्लासरूम और ब्लैकबोर्ड की ओर लौटना ही बच्चों की भलाई के लिए जरूरी है।

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