Tuesday, July 21

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में गुमशुदा लोगों के आंकड़े तलब किए, 23 मार्च को जवाब माँगा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ते गुमशुदा मामलों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों से जुड़े सभी रिकॉर्ड और आंकड़े पेश करने के लिए अपर मुख्य सचिव (गृह) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को 23 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का आदेश दिया।

चौंकाने वाले आंकड़े:
कोर्ट के सामने सुनवाई के दौरान यह जानकारी आई कि पिछले लगभग दो वर्षों में प्रदेश में 1,08,300 लोग लापता हुए, जिनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज है। इनमें से पुलिस केवल 9,700 लोगों का पता लगा सकी है। अदालत ने इसे अत्यंत गंभीर और चिंताजनक स्थिति करार दिया।

लखनऊ में भी बढ़ते मामले:
राजधानी लखनऊ के अलग-अलग इलाकों से लोग लगातार लापता हो रहे हैं। इंदिरानगर के तकरोही इलाके में रामसमुझ की 18 वर्षीय बेटी 29 जनवरी से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता है। दुबग्गा के शेखपुरवा इलाके से 32 वर्षीय जमील अहमद दो महीने पहले लापता हुए और चिनहट इलाके के विक्रम प्रसाद का 30 वर्षीय बेटा जुलाई 2024 से लापता है। कई परिवार महीनों से अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं।

हाईकोर्ट का निर्देश:
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में सरकार को बताना होगा कि इतने बड़े पैमाने पर लापता मामलों के बावजूद बरामदगी की दर इतनी कम क्यों है और गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं। अदालत ने यह मामला केवल कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।

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