Tuesday, July 21

चीन ने गलवान झड़प के बाद किया परमाणु परीक्षण! अमेरिका का बड़ा आरोप, भारत की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

वॉशिंगटन/जिनेवा: अमेरिका ने आरोप लगाया है कि चीन ने 2020 में गुपचुप तरीके से परमाणु परीक्षण किया था। अमेरिकी हथियार नियंत्रण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के अंडर सेक्रेटरी थॉमस डिनानो ने जिनेवा में आयोजित निरस्त्रीकरण सम्मेलन में कहा कि अमेरिकी सरकार को पता है कि 22 जून 2020 को चीन ने परमाणु विस्फोटक परीक्षण किए, जो भारत के साथ गलवान झड़प के तुरंत बाद हुए थे।

अमेरिका ने क्या कहा
डिनानो ने बताया कि चीनी सेना ने इन परमाणु विस्फोटों को छिपाने की कोशिश की और ‘डीकपलिंग’ नामक तकनीक का इस्तेमाल किया, ताकि भूकंपीय निगरानी प्रभावहीन बने। उन्होंने यह भी कहा कि चीन के परीक्षण अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हैं और यह वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।

चीन की प्रतिक्रिया
चीन के राजदूत शेन जियान ने अमेरिका के आरोपों का सीधे जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा कि चीन ने हमेशा परमाणु मुद्दों पर “समझदारी और जिम्मेदारी” से काम किया है। उन्होंने आरोपों को “झूठा” बताते हुए अमेरिका पर हथियारों की होड़ बढ़ाने का दोष लगाया।

अमेरिका चाहता है नई परमाणु संधि
2010 में लागू न्यू START संधि समाप्त हो गई है, जिससे अमेरिका और रूस के बीच रणनीतिक मिसाइलों और वॉरहेड तैनाती पर कोई बाध्यकारी प्रतिबंध नहीं है। डिनानो ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि नई संधि में चीन और रूस भी शामिल हों, ताकि परमाणु हथियारों की होड़ को नियंत्रित किया जा सके। अमेरिका का अनुमान है कि 2030 तक चीन के पास 1,000 से अधिक न्यूक्लियर वॉरहेड होंगे।

भारत के लिए बढ़ते खतरे
चीन के परमाणु परीक्षण और हथियार वृद्धि के खुलासे से भारत की सुरक्षा पर भी चिंता बढ़ गई है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और पूर्व में हुई गलवान जैसी झड़पें इस खतरे को और गंभीर बनाती हैं। भारत के पास वर्तमान में 170 परमाणु हथियार हैं, जबकि चीन 2030 तक 1,000 वॉरहेड तक पहुँच सकता है। इससे दोनों देशों के बीच परमाणु संतुलन बिगड़ने और सुरक्षा जोखिम बढ़ने की संभावना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की बढ़ती परमाणु क्षमता न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती पैदा कर सकती है।

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