Tuesday, July 21

बांग्लादेश में चीनी ड्रोन फैक्ट्री, भारत की अंडरग्राउंड रेल से ‘कमजोर नस’ होगी मजबूत

नई दिल्ली: दक्षिण एशिया की सुरक्षा परिदृश्य में अब तक अनदेखे बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बांग्लादेश ने चीन के सहयोग से सैन्य ड्रोन बनाने की फैक्ट्री लगाने का निर्णय लिया है। वहीं, भारत ने रणनीतिक रूप से अपनी ‘कमजोर नस’ मानी जाने वाली चिकननेक को सुरक्षित करने के लिए अंडरग्राउंड रेल लाइन बिछाने का योजना तैयार कर ली है।

बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार और चीन के सरकारी स्वामित्व वाली रक्षा कंपनी CETC के बीच समझौते के तहत ढाका के पास बोगरा हवाई अड्डे पर ड्रोन उत्पादन सुविधा स्थापित की जाएगी। इस फैसले से बांग्लादेशी वायुसेना मध्यम ऊंचाई कम सहनशक्ति (MALE) ड्रोन और VTOL (ऊर्ध्वाधर टेक-ऑफ और लैंडिंग) ड्रोन बनाएगी, जो सैन्य और मानवीय उद्देश्यों के लिए उपयोग होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारत की सुरक्षा के लिए चिंता का कारण बन सकता है क्योंकि ड्रोन लंबी दूरी तक निगरानी और टोही कर सकते हैं।

वहीं, भारत ने अपने उत्तर-पूर्वी गलियारे में रणनीतिक ‘चिकननेक’ को सुरक्षित करने के लिए पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग से बिहार के किशनगंज तक करीब 40 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड रेल लाइन बिछाने का निर्णय लिया है। यह रूट डुमडांगी से बागडोगरा तक फैलेगा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के संकरे हिस्से को कवर करेगा। लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, यह लाइन केवल यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि आपातकाल या युद्ध की स्थिति में सेना और सैन्य उपकरणों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगी।

भारत की इस अंडरग्राउंड रेल योजना के साथ DRDO द्वारा विकसित D4 सिस्टम भी तैनात किया जा सकता है। यह सिस्टम दुश्मन के ड्रोन को 3-4 किलोमीटर की दूरी में डिटेक्ट, डिनाई और डिस्ट्रॉय कर सकता है। इससे बांग्लादेश सीमा पर चीनी समर्थित ड्रोन रहकर भी निगरानी नहीं कर पाएंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, बांग्लादेश में चीनी ड्रोन फैक्ट्री से बीजिंग का प्रभाव बढ़ेगा और भारतीय सीमा के निकट निगरानी क्षमताओं में भी बदलाव आ सकता है। भारत का अंडरग्राउंड रेल प्रोजेक्ट इस क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने और सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने में अहम साबित होगा।

इस नए समीकरण के बाद दक्षिण एशिया की सुरक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई दे रहा है। भारत-बांग्लादेश की 4,096 किलोमीटर लंबी साझा सीमा और हिंद महासागर में चीन के बढ़ते दबदबे को ध्यान में रखते हुए, नई दिल्ली अपनी रक्षा तैयारियों को और सुदृढ़ कर रही है।

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