Tuesday, July 21

बिहार में बदलेगी सरकारी दफ्तरों की सूरत, हर ब्लॉक को मिलेंगे 30 करोड़ से अधिक रुपये

पटना: बिहार के सरकारी दफ्तरों का रूप बदलने की तैयारी शुरू हो चुकी है। राज्य के सभी 240 प्रखंडों में नए सिरे से प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय और आवासीय परिसर बनाए जाएंगे। इसके लिए हर प्रखंड को 30 करोड़ से भी अधिक की धनराशि आवंटित की गई है।

भवन निर्माण विभाग की ओर से बताया गया है कि प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए इन कार्यालयों का निर्माण किया जा रहा है। 240 प्रखंडों में नए कार्यालय भवनों के साथ-साथ 59 प्रखंडों में विशेष कार्यालय-सह-आवासीय परिसर भी बनेंगे।

निर्माण कार्य और बजट
प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय एवं आवासीय परिसर के निर्माण के लिए प्रति प्रखंड 30.74 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। पुराने भवनों की जगह नए कार्यालय भवन निर्माण के लिए प्रति प्रखंड 16.62 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है।

गया भवन प्रमंडल में 14, छपरा में 13, बेगूसराय में 12, भागलपुर एवं मोतिहारी में 11-11, आरा, बेतिया, दरभंगा, मधुबनी एवं पूर्णिया में 10-10 कार्यालय भवनों का निर्माण कार्य तेजी से जारी है।

नवीनतम सुविधाएँ
नए प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय भवन (G+2) में प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचलाधिकारी सहित अन्य अधिकारी कार्यालय, आधुनिक कॉन्फ्रेंस हॉल, आरटीपीएस काउंटर, कैंटीन और रिकॉर्ड रूम की सुविधा होगी। इन परिसरों में आवासीय सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी, जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए रहने और काम करने का वातावरण और सुविधाजनक होगा।

भवनों की छत पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे, जिससे बिजली की बचत होगी और कार्यालय संचालन अधिक ऊर्जा-कुशल बनेगा।

विशेष परिसर और कार्य की प्रगति
विभागीय सचिव कुमार रवि ने बताया कि 200 से अधिक प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय भवनों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। शेष भवनों के निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी की जा रही है और प्रतिस्पर्धी एवं पारदर्शी तरीके से जल्द ही शेष भवनों का कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ तेजी से पूरा किया जा रहा है और मुख्यालय स्तर से इसका लगातार अनुश्रवण एवं समीक्षा हो रही है। अधिकारियों, संविदाकारों और साइट इंजीनियर्स को गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। कुछ स्थानों पर स्थल की समस्या आ रही है, जिसे शीघ्र ही दूर किया जाएगा।

बिहार सरकार का यह कदम राज्य में प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ बनाने और सरकारी सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

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