Tuesday, July 21

अमेरिका खुद न्यूक्लियर टेस्ट शुरू करने की कोशिश में, गुप्त परमाणु परीक्षण के आरोप पर चीन का बड़ा दावा

बीजिंग: चीन ने अमेरिका के उन आरोपों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि बीजिंग ने गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण किए हैं। चीन ने इसे पूरी तरह झूठा बताते हुए कहा कि अमेरिका इन आरोपों का इस्तेमाल खुद नए परमाणु परीक्षण शुरू करने का बहाना बनाने के लिए कर रहा है

अमेरिका के आरोपों पर चीन की प्रतिक्रिया
शुक्रवार को जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र के निरस्त्रीकरण सम्मेलन में अमेरिका ने कहा था कि चीन ने साल 2020 में गुप्त परमाणु परीक्षण किए थे। चीनी विदेश मंत्रालय ने इसे बेबुनियाद और गैर-जिम्मेदाराना बताया। चीन ने अमेरिका से अपील की कि वह ऐसे कामों को रोकें जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं।

अमेरिका-चीन में क्यों बढ़ी तनातनी
अमेरिकी विदेश उप सचिव थॉमस डिनानो ने आरोप लगाए हैं कि चीन बड़े पैमाने पर नए परमाणु परीक्षण की तैयारी कर रहा है। यह आरोप ऐसे समय पर लगाए गए हैं जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका और रूस के साथ चीन को न्यूक्लियर हथियारों पर सीमा तय करने वाली NEW START संधि में शामिल करने पर जोर दिया था। चीन ने निरस्त्रीकरण बातचीत में भाग लेने से इनकार कर दिया।

अमेरिका की चेतावनी और चीन का बढ़ता जखीरा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि हथियारों पर नियंत्रण केवल अमेरिका और रूस तक सीमित नहीं हो सकता; अन्य देशों की रणनीतिक स्थिरता भी अहम है और इसमें सबसे महत्वपूर्ण नाम चीन का है। अमेरिका का कहना है कि चीन तेजी से अपने परमाणु हथियार बढ़ा रहा है और 2020 तक उसके पास लगभग 1,000 परमाणु हथियार हो सकते हैं।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अक्टूबर 2025 में चेतावनी दी थी कि वॉशिंगटन मॉस्को और बीजिंग के बराबरी के आधार पर परमाणु परीक्षण कर सकता है। अमेरिका बार-बार चीन के परमाणु विस्तार को दुनिया के लिए चिंता का विषय बता चुका है।

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