Tuesday, July 21

लखनऊ हाईकोर्ट ने निकांत जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार मामला रद्द किया, IAS अभिषेक प्रकाश की मुश्किलें कम

लखनऊ: लखनऊ बेंच, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कारोबारी निकांत जैन के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का आपराधिक मामला रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रथमदृष्टया कोई अपराध नहीं बनता और पर्याप्त ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।

निकांत जैन पर आरोप था कि उन्होंने ‘इन्वेस्ट यूपी’ योजना के तहत सोलर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की मंजूरी दिलाने के बदले एक उद्यमी से 5 प्रतिशत रिश्वत की मांग की थी। शिकायत पर 20 मार्च 2025 को गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी और निकांत जैन को गिरफ्तार कर मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई थी।

बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोप अस्पष्ट और साक्ष्यविहीन हैं, और मामला कारोबारी प्रतिद्वंद्विता और प्रशासनिक भ्रम का परिणाम है। अदालत ने आदेश में कहा कि कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने किसी लोकसेवक को अनुचित लाभ देने का प्रयास किया।

साथ ही कोर्ट ने यह भी नोट किया कि शिकायतकर्ता ने स्वयं स्वीकार किया कि यह शिकायत गलतफहमी पर आधारित थी। अदालत ने 15 मई 2025 को दाखिल चार्जशीट और 17 मई 2025 के तलबी आदेश को भी रद्द कर दिया।

निकांत जैन के खिलाफ मामला रद्द होने के बाद इन्वेस्ट यूपी के तत्कालीन सीईओ और आईएएस अभिषेक प्रकाश की मुश्किलें भी कम हो सकती हैं। 20 मार्च 2025 को अभिषेक प्रकाश को निलंबित किया गया था और चार्जशीट जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ दर्ज शिकायतें भी वापस ले ली गई हैं, जिससे उनकी जल्द बहाली की संभावना बढ़ गई है।

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