Tuesday, July 21

भारत-रूस का दुनिया को स्पष्ट संदेश: पुतिन के दिल्ली दौरे से खुश हुआ चीन, ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने की जमकर तारीफ

नई दिल्ली/बीजिंग। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दो दिवसीय भारत दौरे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। गुरुवार 4 दिसंबर को जब पुतिन नई दिल्ली पहुंचे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल से हटकर एयरपोर्ट पर स्वयं उनका स्वागत किया। यह दृश्य न केवल भारत-रूस संबंधों की गर्मजोशी का प्रमाण था, बल्कि वैश्विक मंच पर दोनों देशों की साझेदारी के बढ़ते महत्व को भी दर्शाता है।

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पुतिन का पहला भारत दौरा है। इससे पहले वह 6 दिसंबर 2021 को भारत आए थे। यह दौरा दोनों देशों के बीच वर्ष 2000 में शुरू हुई रणनीतिक साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ पर भी विशेष महत्व रखता है।

चीन में ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने की खुलकर तारीफ

पुतिन के भारत आगमन से चीन में भी खासा उत्साह देखने को मिला। चीन सरकार के करीबी माने जाने वाले अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने इस दौरे की जमकर सराहना करते हुए लिखा कि भारत और रूस ने अमेरिका तथा पश्चिमी देशों को स्पष्ट संदेश दिया है—कि उनके किसी भी दबाव का दोनों देशों के रिश्तों पर असर नहीं पड़ेगा।

चीनी विशेषज्ञों के अनुसार भारत-रूस संबंध इतने “रणनीतिक और स्थिर” हैं कि बाहरी दबाव इन्हें प्रभावित नहीं कर सकता।

चाइना फॉरेन अफेयर्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ली हैडोंग के शब्दों में—
“भारत और रूस का रिश्ता बेहद मजबूत और स्वतंत्र है। दोनों देश बाहरी हस्तक्षेप को झेलने में सक्षम हैं और अपने साझा हितों के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।”

स्वतंत्र विदेश नीति का मजबूत प्रदर्शन

ग्लोबल टाइम्स ने विश्लेषकों के हवाले से यह भी कहा कि भारत और रूस दोनों अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम हैं, जिसे कोई भी देश नियंत्रित नहीं कर सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा यह स्पष्ट घोषणा है कि:

  • न तो भारत और न ही रूस किसी तरह के प्रतिबंध या दबाव के आगे झुकेंगे
  • दोनों देशों की आर्थिक, रक्षा और भू-राजनीतिक पूरकता बेहद मजबूत है
  • पश्चिमी दबाव के बावजूद रूस को वैश्विक मंच से अलग-थलग करना नामुमकिन है

अमेरिका और यूरोप के लिए संकेत

पुतिन की यह यात्रा अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ क्रेमलिन में हुई उनकी बैठक के तुरंत बाद हुई। बैठक से पूर्व पुतिन ने यूरोप को चेतावनी देते हुए कहा था कि रूस किसी भी संभावित संघर्ष के लिए तैयार है।

चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • रूस दबाव में अपने हितों से पीछे हटने वाला देश नहीं
  • भारत भी अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को लेकर उतना ही दृढ़
  • दोनों देशों की साझेदारी पश्चिम को संदेश देती है कि प्रतिबंधों के बावजूद रूस के वैश्विक प्रभाव को कम नहीं किया जा सकता

निष्कर्ष

पुतिन के भारत दौरे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर यह साबित किया है कि भारत और रूस की साझेदारी समय और परिस्थिति के किसी भी दबाव से परे है। चीन द्वारा की गई खुली प्रशंसा इस बात का संकेत है कि दुनिया इस मजबूत रिश्ते को नए वैश्विक समीकरण का केंद्र मानकर देख रही है।

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