Tuesday, July 21

जानिए क्यों वीजा रिजेक्ट हो सकता है अगर नियम नहीं समझे

नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के लिए स्टूडेंट वीजा पाना अब पहले से भी मुश्किल हो गया है। इसके पीछे कारण है ‘जेन्युइन स्टूडेंट रूल (Genuine Student Rule)’, जिसे ठीक से समझे बिना आवेदन करने पर वीजा रिजेक्ट हो सकता है।

क्या है Genuine Student Rule?
ऑस्ट्रेलिया ने 2024 में ‘Genuine Temporary Entrant (GTE)’ नियम को अपडेट करके इसे Genuine Student (GS) रूल में बदल दिया। इस नियम के तहत यह देखा जाता है कि कोई विदेशी छात्र सच में पढ़ाई के इरादे से ऑस्ट्रेलिया आ रहा है या सिर्फ वहां रहने की वजह से वीजा लेना चाहता है।

वीजा अधिकारियों की जांच:
GS रूल के अनुसार वीजा अधिकारी यह जांचते हैं कि:

  • छात्र कौन सा कोर्स पढ़ेगा और क्यों।

  • यह कोर्स उसके करियर में कैसे मदद करेगा

  • छात्र पहले किए गए कोर्स और करियर अनुभव के आधार पर नया कोर्स कैसे जुड़ा हुआ है

एक भारतीय छात्र का मामला हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर सामने आया। उसने पहले मेलबर्न यूनिवर्सिटी से बैचलर्स किया और ऑस्ट्रेलिया में चार साल काम किया। इसके बाद RMIT यूनिवर्सिटी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में मास्टर्स करने के लिए वीजा अप्लाई किया, लेकिन उसका वीजा रिजेक्ट कर दिया गया। अधिकारियों का मानना था कि उसका नया आवेदन GS रूल के तहत असली छात्र होने की शर्त पूरी नहीं करता।

पहले वीजा अप्रूवल का कोई फायदा नहीं:
कई स्टूडेंट्स को लगता है कि ऑस्ट्रेलिया में पहले की डिग्री और जॉब उनके लिए दोबारा स्टडी वीजा पाना आसान बना देंगे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने दोबारा पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए नियम और कड़े कर दिए हैं। अधिकारी अब यह भी चेक करते हैं कि नया कोर्स वास्तव में छात्र के करियर ग्रोथ के लिए जरूरी है या नहीं

किसे वीजा मिलेगा:

  • जो छात्र पढ़ाई के लिए गंभीर हैं।

  • जिनका नया कोर्स उनके पिछले कोर्स और करियर से जुड़ा हो।

  • जो यह साबित कर सकें कि वे अस्थायी रूप से पढ़ाई के उद्देश्य से ऑस्ट्रेलिया आए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के इच्छुक छात्रों को GS रूल को समझकर ही आवेदन करना चाहिए, वरना वीजा रिजेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

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