Tuesday, July 21

बजट और ब्रीफकेस के रंग में राजनीति का संदेश, परिधान भी बनते हैं चुनावी संकेत

पटना: बजट सत्र अब केवल आर्थिक नीतियों और विकास योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक संदेश देने का एक सशक्त मंच भी बन चुका है। केंद्र से लेकर राज्यों तक, बजट प्रस्तुति के दौरान रंग, परिधान और प्रतीकों के जरिए जनभावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश साफ दिखाई देती है।

केंद्र सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हालिया बजट पेश करते समय कांजीवरम साड़ी धारण की, जिसे राजनीतिक विश्लेषक तमिलनाडु की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देख रहे हैं। इससे पहले उन्होंने मिथिला पेंटिंग की साड़ी पहनकर बजट पेश किया था, जिसे बिहार की सांस्कृतिक विरासत से संवाद स्थापित करने की रणनीति माना गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक संदेश चुनावी माहौल में खास महत्व रखते हैं।

बजट ब्रीफकेस के रंग को लेकर भी राजनीति का लंबा इतिहास रहा है। परंपरागत रूप से लाल रंग का ब्रीफकेस बजट प्रस्तुति का प्रतीक रहा है। लेकिन बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के शासनकाल के दौरान इस परंपरा को बदलते हुए हरे रंग का ब्रीफकेस इस्तेमाल किया गया। राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री काल (1997–2005) में वित्त मंत्री हरे ब्रीफकेस के साथ सदन में प्रवेश करते थे, जो उस दौर में व्यापक चर्चा का विषय बना।

उस समय विपक्ष, खासकर बीजेपी, ने इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताते हुए तीखी आलोचना की थी। आरजेडी का झंडा भी हरे रंग का था और पार्टी के विधायक हरी टोपी तथा हरे रंग के परिधान पहनकर अपनी राजनीतिक पहचान को और उभारते थे। समर्थकों के लिए यह सांकेतिक एकजुटता थी, जबकि विरोधियों के लिए राजनीतिक प्रदर्शन।

विशेषज्ञ मानते हैं कि लोकतंत्र में प्रतीक और रंग हमेशा से जनसंपर्क का हिस्सा रहे हैं। बजट जैसे औपचारिक अवसरों पर भी जब राजनीतिक संदेश छिपे हों, तो यह दर्शाता है कि राजनीति केवल नीतियों से नहीं, बल्कि प्रतीकों की भाषा से भी संचालित होती है।

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