Tuesday, July 21

भारतीयों को गर्व होना चाहिए: भारत-अमेरिका ट्रेड डील की वैश्विक सराहना

वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका ने अंतरिम ट्रेड डील का फ्रेमवर्क जारी कर दिया है, जिसे वैश्विक विशेषज्ञों ने एक महत्वपूर्ण डिप्लोमैटिक और आर्थिक उपलब्धि करार दिया है। इस डील के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए अधिकांश टैरिफ में राहत देते हुए इसे 18% तक घटाया है। सबसे बड़ी राहत रूसी तेल पर लागू 25% दंडात्मक टैरिफ को हटाने की है। इसके बदले भारत ने रूस से तेल की खरीद कम करने और अपनी ऊर्जा आयात रणनीति में विविधता लाने का वादा किया है, जिसमें अमेरिका से तेल खरीद भी शामिल है।

इस कदम पर आलोचनाएँ भी हुईं, लेकिन विशेषज्ञों ने भारत की रणनीति की तारीफ की है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के कॉलमिस्ट एवं जियोपॉलिटिक्स विशेषज्ञ सदानंद धुमे ने कहा कि रूस से तेल की खरीद घटाना भारत का सही कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह डील केवल आर्थिक नहीं बल्कि एक डिप्लोमैटिक सफलता है, जिस पर भारतीयों को गर्व होना चाहिए।

धुमे ने कहा, “भारत ने स्पष्ट और साहसिक कदम उठाया। अमेरिकी टैरिफ हटाने के बदले रूस से तेल की खरीद कम करना पूरी तरह उचित है। भारत वैश्विक स्तर पर निवेश और तकनीक को आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धी बने रहने का अवसर पा रहा है।”

दक्षिण एशियाई मामलों के विशेषज्ञ माइकल कुगलमैन ने भी भारत की इस रणनीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने इस डील के माध्यम से यह दिखा दिया कि अपनी बात मनवाने के लिए किसी भी शक्ति के सामने झुकने की जरूरत नहीं है। कुगलमैन ने यह भी बताया कि भारत ने रूस और चीन के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखकर वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारत के लिए न सिर्फ आर्थिक बल्कि वैश्विक कूटनीति में एक बड़ी जीत है।

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