बंगाल में कांग्रेस को क्यों ‘बोझ’ लगने लगा लेफ्ट? गठबंधन में बढ़ती दूरी के पीछे की पूरी कहानी
नई दिल्ली/कोलकाता। भारतीय राजनीति में कांग्रेस और वाम दलों (लेफ्ट) का रिश्ता हमेशा स्थायी और एक जैसा नहीं रहा। कभी यह संबंध वैचारिक समानता के आधार पर मजबूत माना गया, तो कभी राजनीतिक मजबूरी के चलते दोनों दलों को एक मंच पर आना पड़ा। लेकिन बदलते राजनीतिक समीकरणों और लगातार कमजोर होते चुनावी प्रदर्शन ने अब इस रिश्ते में दरार पैदा कर दी है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस धीरे-धीरे लेफ्ट से दूरी बनाती नजर आ रही है और इसकी वजहें काफी अहम हैं।
गठबंधन रहा, लेकिन सफलता नहीं मिली
पश्चिम बंगाल में 2016 के बाद कांग्रेस और लेफ्ट के बीच गठबंधन सक्रिय रहा। उद्देश्य था ममता बनर्जी की टीएमसी और बीजेपी को चुनौती देना। लेकिन चुनावी परिणामों ने बार-बार साबित किया कि यह गठबंधन जमीन पर अपेक्षित असर नहीं डाल सका।
सबसे बड़ा उदाहरण 2021 विधानसभा चुनाव रहा, जब कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ मिलकर 92 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेक...










