Tuesday, July 21

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Brave Ark ने भारत में लॉन्च की 2-इन-1 एंड्रॉयड डिवाइस, 14550mAh बैटरी और बड़े डिस्प्ले के साथ
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Brave Ark ने भारत में लॉन्च की 2-इन-1 एंड्रॉयड डिवाइस, 14550mAh बैटरी और बड़े डिस्प्ले के साथ

नई दिल्ली: Brave Ark नाम के टेक स्टार्टअप ने भारत में अपने नए 2-इन-1 एंड्रॉयड गैजेट को लॉन्च किया है। यह डिवाइस टैबलेट और कंप्यूटर, दोनों रूप में इस्तेमाल की जा सकती है और पढ़ाई, कंटेंट क्रिएशन और प्रोफेशनल कामों में मददगार साबित होगी। कीमत और ऑफर: कीमत: ₹34,999 लॉन्च ऑफर: पहले 200 ग्राहकों को बैकलिट कीबोर्ड फ्री उपलब्ध: अमेज़न कलर: गैलेक्टिक ब्लू डिज़ाइन: लेदर टच कीबोर्ड, मैग्नेटिक कनेक्शन मुख्य फीचर्स और स्पेसिफिकेशन: डिस्प्ले: 12.95 इंच, 144Hz रिफ्रेश रेट, LCD चिपसेट: Snapdragon 8s Gen 3 रैम/स्टोरेज: 12GB RAM, 256GB स्टोरेज कैमरा: 13MP रियर, 5MP फ्रंट बैटरी: 14550mAh, सिंगल चार्ज में 20 घंटे उपयोग ओएस: एंड्रॉयड 15, PC मोड सपोर्ट डिज़ाइन: मेटल यूनिबॉडी, स्लिक 7.6mm बॉडी साथ में: स्टाइलस पेन खास बातें: ...
एंथ्रोपिक का सबसे एडवांस्ड AI मॉडल ‘Opus 4.6’ लॉन्च, कोडिंग से लेकर डॉक्यूमेंट्स तक देगा प्रोफेशनल परफॉर्मेंस
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एंथ्रोपिक का सबसे एडवांस्ड AI मॉडल ‘Opus 4.6’ लॉन्च, कोडिंग से लेकर डॉक्यूमेंट्स तक देगा प्रोफेशनल परफॉर्मेंस

अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने अपना अब तक का सबसे पावरफुल और एडवांस्ड AI मॉडल क्लाउड Opus 4.6 लॉन्च कर दिया है। कंपनी के अनुसार, नया मॉडल कोडिंग, डॉक्यूमेंट्स, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन बनाने जैसे कामों में उच्च स्तर की परफॉर्मेंस देता है। यह बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स को प्रोफेशनल तरीके से पूरा करने में सक्षम है। एंथ्रोपिक के पास तीन प्रकार के AI मॉडल हैं: Opus – सबसे पावरफुल और बड़े कामों के लिए। Sonnet – मीडियम लेवल के कामों के लिए। Haiku – लाइटवेट वर्जन, तेज़ प्रतिक्रिया देता है। Opus 4.6 की खासियतें: बड़े कोडबेस और जटिल प्रोग्रामिंग कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन। बड़े आकार के डॉक्यूमेंट्स को प्रोसेस करने की क्षमता। लंबी बातचीत और बड़े कार्यों के दौरान बेहतर प्लानिंग और निष्पादन। रिसर्च, डॉक्यूमेंट निर्माण और एडिटिंग में मदद। रोजमर्रा के...
एंथ्रोपिक ने पेश किया सबसे एडवांस्ड AI मॉडल Opus 4.6, जानें क्या-क्या कर सकता है
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एंथ्रोपिक ने पेश किया सबसे एडवांस्ड AI मॉडल Opus 4.6, जानें क्या-क्या कर सकता है

अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी एंथ्रोपिक ने अपना अब तक का सबसे पावरफुल AI मॉडल Claude Opus 4.6 लॉन्च कर दिया है। कंपनी का दावा है कि यह मॉडल कोडिंग, डॉक्यूमेंट्स और प्रेजेंटेशन बनाने जैसे जटिल कामों को उच्च प्रदर्शन के साथ कर सकता है और बड़े प्रोजेक्ट्स में भी बेहतर रिजल्ट देता है। एंथ्रोपिक के AI मॉडल्स का परिचयएंथ्रोपिक के पास वर्तमान में तीन AI मॉडल उपलब्ध हैं: Opus – सबसे ताकतवर और बड़े कामों के लिए Sonnet – मीडियम लेवल के कामों के लिए Haiku – सबसे लाइट वर्जन, तेज़ रिस्पॉन्स देने वाला Opus मॉडल को जटिल और बड़े स्केल के कामों के लिए तैयार किया गया है। Claude Opus 4.6 की खासियतें मजबूत और प्रभावशाली कोडिंग क्षमता बड़े डॉक्यूमेंट्स और प्रेजेंटेशन को प्रोसेस करने में सक्षम लंबी बातचीत और बड़े कामों में बेहतर प्रदर्शन काम को बेहतर योजना...
ऑफिसों में बनेंगी AI कर्मचारियों की टीम, OpenAI ने पेश किया Frontier प्लेटफॉर्म
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ऑफिसों में बनेंगी AI कर्मचारियों की टीम, OpenAI ने पेश किया Frontier प्लेटफॉर्म

OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन का कहना है कि भविष्य में वही कंपनियां सफल होंगी, जहाँ AI का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगा और लोग इन AI एजेंट्स की टीम को संभालेंगे। इसी मकसद से OpenAI ने Frontier नाम का नया प्लेटफॉर्म पेश किया है, जो कंपनियों के लिए AI कर्मचारी बनाएगा। Frontier क्या है और क्या करेगा?Frontier प्लेटफॉर्म को खास तौर पर बड़ी एंटरप्राइज कंपनियों के लिए बनाया गया है। इसके माध्यम से कंपनियां अपने इंटरनल सिस्टम में काम करने वाले AI एजेंट्स को मैनेज कर सकेंगी। AI एजेंट्स इंसानी कर्मचारियों की तरह काम करते हैं। उन्हें कंपनी के कामकाज के तरीके समझाए जाते हैं, इनकी ट्रेनिंग होती है और ये फीडबैक से सीखते हैं। प्रत्येक एजेंट की पहचान और सुरक्षा सीमाएं भी निर्धारित की जाती हैं। AI एजेंट्स कैसे काम करेंगे?Frontier प्लेटफॉर्म कंपनी के डेटा वेयरहाउस, CRM सिस्टम और टिकट टूल्स जैसे इंटरनल ऐप्स से...
Starlink का स्मार्टफोन आएगा या नहीं? एलन मस्क ने दिया स्पष्ट जवाब
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Starlink का स्मार्टफोन आएगा या नहीं? एलन मस्क ने दिया स्पष्ट जवाब

Starlink स्मार्टफोन को लेकर हाल ही में जो चर्चाएँ उठी थीं, उस पर एलन मस्क ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल ऐसी किसी डिवाइस पर काम नहीं चल रहा है। कुछ दिन पहले मस्क ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए Starlink स्मार्टफोन की संभावना जताई थी, जिससे कयास लगाए जाने लगे कि कंपनी एक ऐसा स्मार्टफोन ला सकती है जो सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सके। लेकिन अब मस्क ने साफ कर दिया कि Starlink अभी कोई स्मार्टफोन नहीं बना रही। कोई सक्रिय प्रोजेक्ट नहींमस्क ने स्पष्ट किया कि Starlink फिलहाल सिर्फ सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी का मुख्य लक्ष्य दूरदराज और इंटरनेट से वंचित इलाकों तक विश्वसनीय कनेक्टिविटी पहुंचाना है। T-Mobile के साथ साझेदारीहालांकि Starlink स्मार्टफोन पर काम नहीं कर रही, लेकिन अमेरिका में T-Mobile के साथ साझेदारी के तहत कंपनी डायरेक्ट-टू-डिवाइस सैटेलाइट कम्युनिकेशन सुविधा उ...
खो या फट गई गाड़ी की RC? मिनटों में मोबाइल पर पाएं डिजिटल कॉपी, VAHAN 4.0 करेगा मदद
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खो या फट गई गाड़ी की RC? मिनटों में मोबाइल पर पाएं डिजिटल कॉपी, VAHAN 4.0 करेगा मदद

अब गाड़ी की RC (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) खो जाने या फट जाने पर RTO के चक्कर काटना बीते जमाने की बात हो गई है। सरकार ने डिजिटल सुविधाओं को बढ़ावा देते हुए VAHAN 4.0 और Digilocker जैसे प्लेटफॉर्म पर RC की डिजिटल कॉपी उपलब्ध कराई है। VAHAN 4.0 क्या है?VAHAN 4.0 भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा विकसित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह प्लेटफॉर्म पूरे देश के लिए एक समान डेटाबेस का उपयोग करता है, जिससे अलग-अलग राज्यों के RTO के बीच डेटा साझा करना आसान और पारदर्शी हो गया है। VAHAN 4.0 से किए जाने वाले काम: वाहन रजिस्ट्रेशन ओनरशिप ट्रांसफर रोड टैक्स भुगतान फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करना परमिट जारी करना हाइपोथेकेशन यानी वाहन लोन से जुड़ी जानकारी जोड़ना या हटाना RC की डिजिटल कॉपी कैसे डाउनलोड करें? VAHAN 4.0 के जरिए: अपने फोन या कं...
“6-12 महीने और फिर सब खत्म” – Anthropic के CEO की भविष्यवाणी ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की नींद उड़ाई
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“6-12 महीने और फिर सब खत्म” – Anthropic के CEO की भविष्यवाणी ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की नींद उड़ाई

एंथ्रोपिक (Anthropic) के CEO डारियो अमोदेई ने दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में एक चौंकाने वाला बयान दिया। उनका कहना है कि आने वाले 6-12 महीनों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की जरूरत लगभग खत्म हो जाएगी, और AI पूरी तरह से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और कोड लिखने का काम संभाल लेगा। अमोदेई ने बताया कि उनकी कंपनी के इंजीनियर्स पहले से ही AI मॉडल्स का इस्तेमाल कर कोड लिखवा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ शुरुआत है और जल्द ही कोडिंग का पूरा काम AI द्वारा संचालित होगा। सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के पास सिर्फ 6-12 महीनेरिपोर्ट्स के अनुसार, अमोदेई ने WEF के एक सेशन में कहा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के पास अब सिर्फ 6-12 महीने का समय बचा है। उन्होंने कहा कि कोडिंग, जो कभी प्रोग्रामर्स का सबसे मजबूत किला माना जाता था, अब पूरी तरह मशीनों के हाथों में जा सकती है। यह बदलाव अपेक्षा से कहीं तेजी से हो...
आज का सवाल: कीबोर्ड पर अक्षर ABCDE की तरह एक पंक्ति में क्यों नहीं होते?
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आज का सवाल: कीबोर्ड पर अक्षर ABCDE की तरह एक पंक्ति में क्यों नहीं होते?

क्या आपने कभी सोचा है कि कीबोर्ड पर अक्षर A, B, C, D, E की तरह सीधे क्रम में क्यों नहीं होते? अधिकांश लोग सोचते हैं कि ऐसा टाइपिंग की स्पीड बढ़ाने के लिए किया गया है, लेकिन वास्तविक कारण इसके बिल्कुल उलट है। टाइपराइटर की समस्या1870 के दशक में जब पहले टाइपराइटर आए, तब उनके बटन ABCDE के क्रम में ही होते थे। मशीनें पूरी तरह मकैनिकल थीं और तेजी से टाइप करने पर अक्सर जाम हो जाती थीं। इससे काम बार-बार रुक जाता था और टाइपिंग की गति प्रभावित होती थी। फिर आया QWERTY फॉर्मूलाइस समस्या से निपटने के लिए क्रिस्टोफर लैथम शोल्स ने QWERTY लेआउट पेश किया। इसमें सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले अक्षरों जैसे E, I, T, A को एक-दूसरे से दूर रखा गया। इस बदलाव से टाइप करने वाले की उंगलियों को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे टाइपिंग की स्पीड थोड़ी कम हुई और मशीनें जाम नहीं हुईं। इस तरह कीबोर्ड का यह लेआउट QWER...
ऑफिस में साथ काम कर रहा इंसान या AI? मस्क का ‘ह्यूमन एमुलेटर’ मचाने वाला है सनसनी
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ऑफिस में साथ काम कर रहा इंसान या AI? मस्क का ‘ह्यूमन एमुलेटर’ मचाने वाला है सनसनी

इलॉन मस्क की AI कंपनी xAI एक ऐसे क्रांतिकारी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है जो भविष्य में दफ्तरों का स्वरूप हमेशा के लिए बदल सकता है। पूर्व इंजीनियर सुलेमान घोरी के वायरल पॉडकास्ट ने इस प्रोजेक्ट की झलक दी। उन्होंने बताया कि मस्क की टीम ‘ह्यूमन एमुलेटर’ (Human Emulator) विकसित कर रही है। यह कोई आम चैटबॉट नहीं है, बल्कि वर्चुअल डिजिटल इंसान हैं जो कंप्यूटर पर बिल्कुल वैसे ही काम कर सकते हैं जैसे असली कर्मचारी। ये की-बोर्ड और माउस का इस्तेमाल कर सकते हैं, फाइलें खोल सकते हैं, ईमेल लिख सकते हैं, और किसी भी सॉफ्टवेयर पर इंसानों जैसी दक्षता दिखा सकते हैं। घोरी के मुताबिक, ये AI इतने असली लगते हैं कि कई बार xAI के असली कर्मचारी भी भ्रमित हो जाते हैं। कई मामलों में मैनेजर समझ ही नहीं पाए कि जिसे काम सौंपा गया था, वह इंसान नहीं बल्कि AI था। पॉडकास्ट के बाद घोरी ने xAI छोड़ने का ऐलान किया। AI कर्मचा...
कोरियन हो या इंग्लिश, हर YouTube वीडियो अब देखें अपनी भाषा में – 27 भाषाओं में ऑटो डबिंग फीचर सभी के लिए उपलब्ध
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कोरियन हो या इंग्लिश, हर YouTube वीडियो अब देखें अपनी भाषा में – 27 भाषाओं में ऑटो डबिंग फीचर सभी के लिए उपलब्ध

यूट्यूब ने घोषणा की है कि उसका ऑटो डबिंग फीचर अब सभी उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है। भारत में अब दर्शक कोरियन, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं के वीडियो अपनी पसंदीदा भाषा में देख सकेंगे। यह फीचर कुल 27 भाषाओं में वीडियो को डब करने का विकल्प देता है, जिसमें हिंदी भी शामिल है। यूट्यूब की प्रोडक्ट मैनेजर चंद्रलेखा मोताती ने बताया कि ऑटो डबिंग का मकसद केवल शब्दों का अनुवाद नहीं, बल्कि वीडियो की भावनाओं और क्रिएटर की एक्सप्रेशन को भी बरकरार रखना है। इसके लिए कंपनी ने नया फीचर Expressive Speech लॉन्च किया है, जो फिलहाल हिंदी समेत 8 भाषाओं में उपलब्ध है। इसका मतलब है कि यदि कोई क्रिएटर उत्साह या भावनाओं के साथ बोल रहा है, तो डब की गई आवाज़ में भी वह ऊर्जा और भावनात्मक उतार-चढ़ाव महसूस होंगे। स्मार्ट फिल्टर से वीडियो की गुणवत्ता बरकरारयूट्यूब का स्मार्ट फिल्टर खुद पहचान लेगा कि कौन से वीडियो को डब नहीं क...