Explainer: लोकसभा हंगामे में चर्चा में आए तीन प्रमुख नियम – रूल 349, 358 और 389
नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र में मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सत्ता पक्ष के बीच हंगामा उस समय बढ़ गया जब राहुल गांधी ने चीन और डोकलाम मुद्दा उठाते हुए पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब का जिक्र किया। सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई और स्पीकर ओम बिरला ने भी इस पर बोलने से रोका। इस दौरान संसदीय कार्यवाही के तीन नियमों – रूल 349, 358 और 389 – का हवाला दिया गया।
रूल 349 क्या है?रूल 349 संसदीय कार्यवाही के दौरान सदस्यों के आचार और व्यवहार को नियंत्रित करता है। इसके तहत सांसद सदन की कार्यवाही से संबंधित विषयों के अलावा किसी किताब, अखबार या पत्र का जिक्र नहीं कर सकते, जब तक कि वह चर्चा से सीधे तौर पर जुड़ा न हो और संसदीय परंपराओं के अनुसार उचित न माना जाए। इस नियम का उद्देश्य सदन में केवल सत्यापित और प्रासंगिक जानकारी पर चर्चा सुनिश्चित करना है और संसदीय गरिमा बनाए रखना है...










