दुनिया देखेगी झारखंड के ‘मेगालीथ’ को, CM हेमंत बताएंगे दावोस-यूके में प्राचीन भू-दृश्य की गाथा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आगामी दावोस और यूनाइटेड किंगडम की यात्रा में सिर्फ झारखंड की औद्योगिक और शैक्षिक क्षमताओं को ही नहीं बल्कि राज्य की प्राचीन भू-विरासत को भी वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेंगे। झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र को वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की वह पहली जमीन माना जाता है, जो करोड़ों साल पहले समुद्र से ऊपर उभरी थी।
मेगालीथ और जीवाश्मयुक्त वन की अद्वितीयता:
राज्य के जंगलों, पहाड़ों और गुफाओं में मौजूद मेगालीथ (वृहत पाषाण) और शैल चित्र हजारों वर्षों से मानव इतिहास और भू-इतिहास के प्राचीनतम साक्ष्य हैं। हजारीबाग के पकरी बरवाडीह में स्थित मेगालीथ सूर्य की गति और इक्वीनॉक्स से जुड़े हैं। इसके साथ ही गुफाओं में मौजूद प्राचीन भित्ति चित्र और जीवाश्मयुक्त वन झारखंड की भू-सांस्कृतिक निरंतरता को दर्शाते हैं।
विश्व स्तर पर पहचान और संरक्षण का प्रयास:
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