मासूमों के दिमाग को हाईजैक करने वाले ‘साइलेंट किलर’ बने ऑनलाइन गेम, भारत में भी तय हो न्यूनतम उम्र
नई दिल्ली: गाजियाबाद की त्रासदी ने एक बार फिर डिजिटल दुनिया के खतरों को उजागर किया है। बीते दिनों तीन नाबालिग सगी बहनों ने 9वें फ्लोर से कूदकर अपनी जान दे दी, और शुरुआती रिपोर्ट्स में इसका कारण टास्क-आधारित ऑनलाइन गेमिंग की लत बताया जा रहा है।
आज बच्चों के हाथों में स्मार्टफोन सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक हथियार बन चुके हैं। सोशल मीडिया और टास्क-आधारित गेम्स मासूम दिमागों को हाईजैक कर अवसाद और आत्महत्या जैसी परिस्थितियों की ओर धकेल रहे हैं।
डिजिटल दुनिया का पुराना खतरनाक खेल
यह घटना कोई नई नहीं है। साल 2017 में ब्लू व्हेल चैलेंज ने बच्चों को टास्क पूरे करने के बाद आत्महत्या के लिए उकसाया था। इसके बाद मोमो चैलेंज, पिंक व्हेल, और अब PUBG, Free Fire तथा कोरियन लव गेम्स जैसी गेम्स ने बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ाया है। ये गेम्स सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि ...










